अंतिम अद्यतन: 18 अक्टूबर 2026 (Last updated: 18 October 2026)
संक्षिप्त उत्तर: शपथ पत्र (एफिडेविट) तथ्यों का ऐसा लिखित कथन है जिसे अभिसाक्षी (deponent) नोटरी, शपथ आयुक्त (ओथ कमिश्नर) या मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ लेकर या सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करके सत्यापित करता है। इसमें अभिसाक्षी का पूरा परिचय, क्रमांकित प्रस्तरों में केवल तथ्य, सत्यापन खंड, हस्ताक्षर और प्रमाणित करने वाले अधिकारी की मुहर होती है। नोटरी के सामने स्वयं उपस्थित होकर, मूल पहचान पत्र दिखाकर, उनकी उपस्थिति में हस्ताक्षर करना आवश्यक है। स्टाम्प शुल्क राज्य के नियमों पर निर्भर करता है और अधिकांश राज्यों में अब ई-स्टाम्प से दिया जाता है।
शपथ पत्र, स्व-घोषणा और अनापत्ति प्रमाणपत्र में अंतर
| दस्तावेज़ | क्या है | औपचारिकता |
|---|---|---|
| शपथ पत्र | शपथ या प्रतिज्ञान पर दिया गया तथ्यों का लिखित कथन | नोटरी, शपथ आयुक्त या मजिस्ट्रेट द्वारा प्रमाणन; राज्य के नियम या प्राप्तकर्ता कार्यालय की माँग पर स्टाम्प |
| स्व-घोषणा | बिना शपथ के, व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित तथ्यों का कथन | सादा कागज़, हस्ताक्षर और दिनांक; नोटरी की आवश्यकता नहीं, जब तक कार्यालय न माँगे |
| अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) | किसी अधिकार या हित वाले व्यक्ति (स्वामी, माता-पिता, नियोक्ता) का यह लिखित कथन कि उसे आपत्ति नहीं है | देने वाले के हस्ताक्षर, साथ में उसकी पहचान या स्वामित्व का प्रमाण |
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, भारत सरकार, लंबे समय से सरकारी कार्यालयों को यह सलाह देता रहा है कि जहाँ कानून में शपथ पत्र अनिवार्य न हो, वहाँ स्व-घोषणा और स्व-अभिप्रमाणित प्रतियाँ स्वीकार की जाएँ। इसलिए नोटरी के पास जाने से पहले कार्यालय के निर्देश अवश्य पढ़ें।
शपथ पत्र कौन प्रमाणित कर सकता है
| अधिकारी | अधिकार का स्रोत | सामान्य उपयोग |
|---|---|---|
| नोटरी पब्लिक | नोटरी अधिनियम, 1952 की धारा 8 | कार्यालयों, बैंकों, शिक्षण संस्थाओं और निजी प्रयोजन के अधिकांश शपथ पत्र |
| शपथ आयुक्त | सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 139; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 333 | न्यायालय में दाखिल होने वाले शपथ पत्र |
| न्यायिक या कार्यपालक मजिस्ट्रेट | सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 139; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 333 | न्यायालय के शपथ पत्र, और वे प्रमाणपत्र जिनके लिए कार्यालय मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ पत्र माँगता है |
| भारतीय राजनयिक या कांसुलर अधिकारी | राजनयिक और कांसुलर अधिकारी (शपथ और फीस) अधिनियम, 1948 | विदेश में रहने वाले भारतीयों के शपथ पत्र |
नोटरी प्रक्रिया: चरण दर चरण
- कार्यालय के निर्देश पढ़ें: स्व-घोषणा पर्याप्त है या शपथ पत्र चाहिए? स्टाम्प पेपर पर या सादे कागज़ पर? किस अधिकारी के समक्ष? कोई निर्धारित प्रपत्र तो नहीं है?
- प्रारूप भरें: नाम, माता-पिता या पति का नाम, आयु, पता और तथ्य अपने पहचान पत्रों से मिलाकर लिखें। अनुपयुक्त विकल्प और कोष्ठक हटा दें।
- ई-स्टाम्प लें (यदि आवश्यक हो): अधिकृत केंद्र से अभिसाक्षी के नाम पर, विवरण में “शपथ पत्र” या “Affidavit” लिखवाकर। शुल्क की वर्तमान राशि वहीं से पूछें।
- प्रिंट करें, पर हस्ताक्षर न करें। हस्ताक्षर अधिकारी के सामने ही होंगे।
- स्वयं उपस्थित हों: मूल पहचान पत्र साथ ले जाएँ। नोटरी आपकी पहचान से संतुष्ट होकर शपथ या प्रतिज्ञान कराते हैं।
- अधिकारी के सामने प्रत्येक पृष्ठ पर हस्ताक्षर करें।
- प्रमाणन जाँचें: नोटरी के हस्ताक्षर, मुहर, पंजीकरण संख्या, दिनांक और रजिस्टर में प्रविष्टि की संख्या।
- प्रति रखें: मूल जमा करने से पहले स्कैन और फोटोकॉपी सुरक्षित रखें।
ध्यान रखें: पहले से हस्ताक्षर करके किसी और के हाथ “नोटरी की मुहर” लगवाना गलत है। जो शपथ पत्र वास्तव में अधिकारी के समक्ष सत्यापित नहीं हुआ, वह दोषपूर्ण है और अस्वीकार हो सकता है।
स्टाम्प पेपर और ई-स्टाम्प
- शपथ पत्र भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (जैसा प्रत्येक राज्य ने अपनाया और संशोधित किया है) के अंतर्गत एक लिखत है, जिस पर छोटा निश्चित स्टाम्प शुल्क लगता है। राशि और छूट राज्य दर राज्य अलग हैं।
- न्यायालय में दाखिल होने वाले शपथ पत्रों पर प्रायः यह स्टाम्प शुल्क नहीं लगता; वहाँ न्यायालय शुल्क के नियम लागू होते हैं।
- उत्तर प्रदेश सहित अधिकांश राज्यों में स्टाम्प शुल्क अब ई-स्टाम्प प्रमाणपत्र से दिया जाता है, जिसकी विशिष्ट संख्या ऑनलाइन सत्यापित की जा सकती है।
शपथ पत्र का निःशुल्क नमूना (सामान्य प्रयोजन)
शपथ पत्र
मैं, [नाम], [पुत्र / पुत्री / पत्नी] श्री [नाम], आयु [ ] वर्ष, व्यवसाय [ ], निवासी [पिन कोड सहित पूरा पता], सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता/करती हूँ और घोषित करता/करती हूँ कि:
1. मैं उपर्युक्त पते का निवासी हूँ और इस शपथ पत्र में वर्णित तथ्यों से भली भाँति परिचित हूँ।
2. [तथ्य, उदाहरण: मेरी जन्मतिथि [ ] है, जैसा कि मेरे हाईस्कूल प्रमाणपत्र में अंकित है।]
3. [तथ्य, उदाहरण: [प्रमाणपत्र / दस्तावेज़] में मेरा नाम त्रुटिवश [ ] लिख गया है, जबकि मेरा सही नाम [ ] है। दोनों नाम एक ही व्यक्ति, अर्थात मेरे, हैं।]
4. यह शपथ पत्र [प्रयोजन, उदाहरण: [कार्यालय / संस्था] में अभिलेख सुधार] हेतु प्रस्तुत किया जा रहा है।
सत्यापन: मैं, उपर्युक्त अभिसाक्षी, सत्यापित करता/करती हूँ कि इस शपथ पत्र के प्रस्तर 1 से 4 तक के कथन मेरी व्यक्तिगत जानकारी में सत्य एवं सही हैं, इसका कोई अंश असत्य नहीं है तथा कोई तथ्य छिपाया नहीं गया है। आज दिनांक [ ] को [स्थान] पर सत्यापित किया।
[अभिसाक्षी के हस्ताक्षर]
[नोटरी / शपथ आयुक्त का प्रमाणन, मुहर, पंजीकरण संख्या और दिनांक]
शपथ पत्र लिखने के नियम
- केवल तथ्य लिखें; तर्क, राय या कानूनी निष्कर्ष नहीं।
- जो बात आप स्वयं जानते हैं और जो किसी अभिलेख या व्यक्ति से जानकारी पर आधारित है, उन्हें अलग रखें और जानकारी का स्रोत बताएँ। सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 19 नियम 3 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 333(2) यही अपेक्षा करते हैं।
- नाम ठीक वैसा लिखें जैसा पहचान पत्रों में है, और पूरा पता दें।
- हर प्रस्तर को क्रमांकित करें और हर पृष्ठ पर हस्ताक्षर करें।
- आधार संख्या पूरी लिखना आवश्यक न हो तो केवल अंतिम चार अंक लिखें।
सत्यापन खंड के प्रकार
| स्थिति | शब्दावली |
|---|---|
| सभी तथ्य व्यक्तिगत जानकारी में | “…प्रस्तर 1 से [ ] तक के कथन मेरी व्यक्तिगत जानकारी में सत्य एवं सही हैं…” |
| कुछ तथ्य अभिलेख पर आधारित | “…प्रस्तर [ ] से [ ] तक [ ] द्वारा रखे गए अभिलेखों पर आधारित हैं, जिन्हें मैं सत्य मानता/मानती हूँ…” |
| कुछ तथ्य किसी से प्राप्त जानकारी पर आधारित | “…प्रस्तर [ ] से [ ] तक [स्रोत] से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं, जिसे मैं सत्य मानता/मानती हूँ…” |
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झूठा शपथ पत्र देने के परिणाम
भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 के अनुसार जो व्यक्ति शपथ से या विधि के स्पष्ट उपबंध से सत्य कहने के लिए आबद्ध होते हुए ऐसा कथन करता है जिसे वह मिथ्या जानता है या सत्य नहीं मानता, वह मिथ्या साक्ष्य देता है।
| धारा | अपराध | अधिकतम दंड |
|---|---|---|
| धारा 229(1) | न्यायिक कार्यवाही में साशय मिथ्या साक्ष्य देना | 7 वर्ष तक का कारावास और ₹10,000 तक जुर्माना |
| धारा 229(2) | किसी अन्य मामले में साशय मिथ्या साक्ष्य देना | 3 वर्ष तक का कारावास और ₹5,000 तक जुर्माना |
| धारा 236 | ऐसी घोषणा में मिथ्या कथन जिसे लोक सेवक विधि द्वारा साक्ष्य के रूप में लेने के लिए प्राधिकृत है | मिथ्या साक्ष्य के समान |
न्यायालय में दाखिल शपथ पत्र के मामले में न्यायालय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 379 के अंतर्गत प्रारंभिक जाँच करके मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद दायर कर सकता है। 1 जुलाई 2024 से पहले के कृत्यों पर भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता के संगत प्रावधान लागू होते हैं। अभियोजन के अतिरिक्त, झूठे शपथ पत्र के आधार पर मिला प्रवेश, नियुक्ति या प्रमाणपत्र रद्द भी हो सकता है।
सामान्य गलतियाँ
- पहचान पत्र से अलग वर्तनी में नाम लिखना, या पिता अथवा पति का नाम छोड़ देना।
- किसी दूसरे के प्रारूप से ऐसे तथ्य उतार लेना जो आपके मामले पर लागू नहीं होते।
- जहाँ कार्यालय का अपना निर्धारित प्रपत्र है (पासपोर्ट के अनुलग्नक, विश्वविद्यालय के प्रारूप, बैंक की क्षतिपूर्ति), वहाँ अपना प्रारूप लगाना।
- खाली स्थान छोड़कर हस्ताक्षर कर देना।
- नोटरी के सामने उपस्थित हुए बिना प्रमाणन करवाना।
हर शपथ पत्र पहली बार में सही। Affidavit and NOC Set संपादन योग्य वर्ड और पीडीएफ़ में है, जिसमें छायांकित टिप्पणियाँ बताती हैं कि क्या भरना है, क्या हटाना है और क्या संलग्न करना है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या शपथ पत्र सादे कागज़ पर बन सकता है?
कई कार्यालय सादे कागज़ पर शपथ पत्र या स्व-घोषणा स्वीकार करते हैं। प्राप्तकर्ता कार्यालय के निर्देशों का पालन करें।
शपथ पत्र पर कितना स्टाम्प शुल्क लगता है?
यह राज्य के स्टाम्प कानून और प्रयोजन पर निर्भर है। नोटरी या अधिकृत ई-स्टाम्प केंद्र से वर्तमान राशि पूछें।
क्या नोटरी के सामने स्वयं जाना ज़रूरी है?
हाँ। अभिसाक्षी को स्वयं उपस्थित होकर, पहचान दिखाकर, अधिकारी के सामने शपथ या प्रतिज्ञान करना और हस्ताक्षर करना होता है।
शपथ और प्रतिज्ञान में क्या अंतर है?
शपथ अधिनियम, 1969 के अंतर्गत व्यक्ति शपथ के स्थान पर सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान कर सकता है। दोनों का विधिक प्रभाव समान है।
क्या शपथ पत्र की कोई वैधता अवधि होती है?
कानून में कोई सामान्य अवधि तय नहीं है, पर कई कार्यालय हाल की तिथि का शपथ पत्र माँगते हैं। तथ्य बदल जाएँ तो नया शपथ पत्र बनाएँ।
नोटरी और शपथ आयुक्त में क्या अंतर है?
नोटरी नोटरी अधिनियम, 1952 के अंतर्गत नियुक्त होते हैं और सामान्य प्रयोजन के शपथ पत्र प्रमाणित करते हैं। शपथ आयुक्त न्यायालय द्वारा नियुक्त होते हैं और मुख्यतः न्यायालय में दाखिल होने वाले शपथ पत्र प्रमाणित करते हैं।
*यह लेख सामान्य जानकारी है, विधिक परामर्श नहीं (general information, not legal advice).*

