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  • शपथ पत्र (एफिडेविट) का प्रारूप और नोटरी प्रक्रिया

    शपथ पत्र (एफिडेविट) का प्रारूप और नोटरी प्रक्रिया

    अंतिम अद्यतन: 18 अक्टूबर 2026 (Last updated: 18 October 2026)

    संक्षिप्त उत्तर: शपथ पत्र (एफिडेविट) तथ्यों का ऐसा लिखित कथन है जिसे अभिसाक्षी (deponent) नोटरी, शपथ आयुक्त (ओथ कमिश्नर) या मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ लेकर या सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करके सत्यापित करता है। इसमें अभिसाक्षी का पूरा परिचय, क्रमांकित प्रस्तरों में केवल तथ्य, सत्यापन खंड, हस्ताक्षर और प्रमाणित करने वाले अधिकारी की मुहर होती है। नोटरी के सामने स्वयं उपस्थित होकर, मूल पहचान पत्र दिखाकर, उनकी उपस्थिति में हस्ताक्षर करना आवश्यक है। स्टाम्प शुल्क राज्य के नियमों पर निर्भर करता है और अधिकांश राज्यों में अब ई-स्टाम्प से दिया जाता है।

    शपथ पत्र, स्व-घोषणा और अनापत्ति प्रमाणपत्र में अंतर

    दस्तावेज़क्या हैऔपचारिकता
    शपथ पत्रशपथ या प्रतिज्ञान पर दिया गया तथ्यों का लिखित कथननोटरी, शपथ आयुक्त या मजिस्ट्रेट द्वारा प्रमाणन; राज्य के नियम या प्राप्तकर्ता कार्यालय की माँग पर स्टाम्प
    स्व-घोषणाबिना शपथ के, व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षरित तथ्यों का कथनसादा कागज़, हस्ताक्षर और दिनांक; नोटरी की आवश्यकता नहीं, जब तक कार्यालय न माँगे
    अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी)किसी अधिकार या हित वाले व्यक्ति (स्वामी, माता-पिता, नियोक्ता) का यह लिखित कथन कि उसे आपत्ति नहीं हैदेने वाले के हस्ताक्षर, साथ में उसकी पहचान या स्वामित्व का प्रमाण

    प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, भारत सरकार, लंबे समय से सरकारी कार्यालयों को यह सलाह देता रहा है कि जहाँ कानून में शपथ पत्र अनिवार्य न हो, वहाँ स्व-घोषणा और स्व-अभिप्रमाणित प्रतियाँ स्वीकार की जाएँ। इसलिए नोटरी के पास जाने से पहले कार्यालय के निर्देश अवश्य पढ़ें।

    शपथ पत्र कौन प्रमाणित कर सकता है

    अधिकारीअधिकार का स्रोतसामान्य उपयोग
    नोटरी पब्लिकनोटरी अधिनियम, 1952 की धारा 8कार्यालयों, बैंकों, शिक्षण संस्थाओं और निजी प्रयोजन के अधिकांश शपथ पत्र
    शपथ आयुक्तसिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 139; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 333न्यायालय में दाखिल होने वाले शपथ पत्र
    न्यायिक या कार्यपालक मजिस्ट्रेटसिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 139; भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 333न्यायालय के शपथ पत्र, और वे प्रमाणपत्र जिनके लिए कार्यालय मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ पत्र माँगता है
    भारतीय राजनयिक या कांसुलर अधिकारीराजनयिक और कांसुलर अधिकारी (शपथ और फीस) अधिनियम, 1948विदेश में रहने वाले भारतीयों के शपथ पत्र

    नोटरी प्रक्रिया: चरण दर चरण

    1. कार्यालय के निर्देश पढ़ें: स्व-घोषणा पर्याप्त है या शपथ पत्र चाहिए? स्टाम्प पेपर पर या सादे कागज़ पर? किस अधिकारी के समक्ष? कोई निर्धारित प्रपत्र तो नहीं है?
    2. प्रारूप भरें: नाम, माता-पिता या पति का नाम, आयु, पता और तथ्य अपने पहचान पत्रों से मिलाकर लिखें। अनुपयुक्त विकल्प और कोष्ठक हटा दें।
    3. ई-स्टाम्प लें (यदि आवश्यक हो): अधिकृत केंद्र से अभिसाक्षी के नाम पर, विवरण में “शपथ पत्र” या “Affidavit” लिखवाकर। शुल्क की वर्तमान राशि वहीं से पूछें।
    4. प्रिंट करें, पर हस्ताक्षर न करें। हस्ताक्षर अधिकारी के सामने ही होंगे।
    5. स्वयं उपस्थित हों: मूल पहचान पत्र साथ ले जाएँ। नोटरी आपकी पहचान से संतुष्ट होकर शपथ या प्रतिज्ञान कराते हैं।
    6. अधिकारी के सामने प्रत्येक पृष्ठ पर हस्ताक्षर करें।
    7. प्रमाणन जाँचें: नोटरी के हस्ताक्षर, मुहर, पंजीकरण संख्या, दिनांक और रजिस्टर में प्रविष्टि की संख्या।
    8. प्रति रखें: मूल जमा करने से पहले स्कैन और फोटोकॉपी सुरक्षित रखें।

    ध्यान रखें: पहले से हस्ताक्षर करके किसी और के हाथ “नोटरी की मुहर” लगवाना गलत है। जो शपथ पत्र वास्तव में अधिकारी के समक्ष सत्यापित नहीं हुआ, वह दोषपूर्ण है और अस्वीकार हो सकता है।

    स्टाम्प पेपर और ई-स्टाम्प

    • शपथ पत्र भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (जैसा प्रत्येक राज्य ने अपनाया और संशोधित किया है) के अंतर्गत एक लिखत है, जिस पर छोटा निश्चित स्टाम्प शुल्क लगता है। राशि और छूट राज्य दर राज्य अलग हैं।
    • न्यायालय में दाखिल होने वाले शपथ पत्रों पर प्रायः यह स्टाम्प शुल्क नहीं लगता; वहाँ न्यायालय शुल्क के नियम लागू होते हैं।
    • उत्तर प्रदेश सहित अधिकांश राज्यों में स्टाम्प शुल्क अब ई-स्टाम्प प्रमाणपत्र से दिया जाता है, जिसकी विशिष्ट संख्या ऑनलाइन सत्यापित की जा सकती है।

    शपथ पत्र का निःशुल्क नमूना (सामान्य प्रयोजन)

    शपथ पत्र

    मैं, [नाम], [पुत्र / पुत्री / पत्नी] श्री [नाम], आयु [ ] वर्ष, व्यवसाय [ ], निवासी [पिन कोड सहित पूरा पता], सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान करता/करती हूँ और घोषित करता/करती हूँ कि:

    1. मैं उपर्युक्त पते का निवासी हूँ और इस शपथ पत्र में वर्णित तथ्यों से भली भाँति परिचित हूँ।

    2. [तथ्य, उदाहरण: मेरी जन्मतिथि [ ] है, जैसा कि मेरे हाईस्कूल प्रमाणपत्र में अंकित है।]

    3. [तथ्य, उदाहरण: [प्रमाणपत्र / दस्तावेज़] में मेरा नाम त्रुटिवश [ ] लिख गया है, जबकि मेरा सही नाम [ ] है। दोनों नाम एक ही व्यक्ति, अर्थात मेरे, हैं।]

    4. यह शपथ पत्र [प्रयोजन, उदाहरण: [कार्यालय / संस्था] में अभिलेख सुधार] हेतु प्रस्तुत किया जा रहा है।

    सत्यापन: मैं, उपर्युक्त अभिसाक्षी, सत्यापित करता/करती हूँ कि इस शपथ पत्र के प्रस्तर 1 से 4 तक के कथन मेरी व्यक्तिगत जानकारी में सत्य एवं सही हैं, इसका कोई अंश असत्य नहीं है तथा कोई तथ्य छिपाया नहीं गया है। आज दिनांक [ ] को [स्थान] पर सत्यापित किया।

    [अभिसाक्षी के हस्ताक्षर]
    [नोटरी / शपथ आयुक्त का प्रमाणन, मुहर, पंजीकरण संख्या और दिनांक]

    शपथ पत्र लिखने के नियम

    • केवल तथ्य लिखें; तर्क, राय या कानूनी निष्कर्ष नहीं।
    • जो बात आप स्वयं जानते हैं और जो किसी अभिलेख या व्यक्ति से जानकारी पर आधारित है, उन्हें अलग रखें और जानकारी का स्रोत बताएँ। सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 19 नियम 3 और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 333(2) यही अपेक्षा करते हैं।
    • नाम ठीक वैसा लिखें जैसा पहचान पत्रों में है, और पूरा पता दें।
    • हर प्रस्तर को क्रमांकित करें और हर पृष्ठ पर हस्ताक्षर करें।
    • आधार संख्या पूरी लिखना आवश्यक न हो तो केवल अंतिम चार अंक लिखें।

    सत्यापन खंड के प्रकार

    स्थितिशब्दावली
    सभी तथ्य व्यक्तिगत जानकारी में“…प्रस्तर 1 से [ ] तक के कथन मेरी व्यक्तिगत जानकारी में सत्य एवं सही हैं…”
    कुछ तथ्य अभिलेख पर आधारित“…प्रस्तर [ ] से [ ] तक [ ] द्वारा रखे गए अभिलेखों पर आधारित हैं, जिन्हें मैं सत्य मानता/मानती हूँ…”
    कुछ तथ्य किसी से प्राप्त जानकारी पर आधारित“…प्रस्तर [ ] से [ ] तक [स्रोत] से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं, जिसे मैं सत्य मानता/मानती हूँ…”

    पूरा, संपादन योग्य सेट चाहिए? Lexfolio के Affidavit and NOC Set में सामान्य शपथ पत्र, नाम परिवर्तन, निवास प्रमाण, शिक्षा में अंतराल, आय, दस्तावेज़ खोने, तथा मकान मालिक, माता-पिता और नियोक्ता के अनापत्ति प्रमाणपत्र के हिंदी और अंग्रेज़ी प्रारूप हैं, साथ में स्टाम्प और प्रमाणन पर मार्गदर्शन।

    झूठा शपथ पत्र देने के परिणाम

    भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 227 के अनुसार जो व्यक्ति शपथ से या विधि के स्पष्ट उपबंध से सत्य कहने के लिए आबद्ध होते हुए ऐसा कथन करता है जिसे वह मिथ्या जानता है या सत्य नहीं मानता, वह मिथ्या साक्ष्य देता है।

    धाराअपराधअधिकतम दंड
    धारा 229(1)न्यायिक कार्यवाही में साशय मिथ्या साक्ष्य देना7 वर्ष तक का कारावास और ₹10,000 तक जुर्माना
    धारा 229(2)किसी अन्य मामले में साशय मिथ्या साक्ष्य देना3 वर्ष तक का कारावास और ₹5,000 तक जुर्माना
    धारा 236ऐसी घोषणा में मिथ्या कथन जिसे लोक सेवक विधि द्वारा साक्ष्य के रूप में लेने के लिए प्राधिकृत हैमिथ्या साक्ष्य के समान

    न्यायालय में दाखिल शपथ पत्र के मामले में न्यायालय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 379 के अंतर्गत प्रारंभिक जाँच करके मजिस्ट्रेट के समक्ष परिवाद दायर कर सकता है। 1 जुलाई 2024 से पहले के कृत्यों पर भारतीय दंड संहिता और दंड प्रक्रिया संहिता के संगत प्रावधान लागू होते हैं। अभियोजन के अतिरिक्त, झूठे शपथ पत्र के आधार पर मिला प्रवेश, नियुक्ति या प्रमाणपत्र रद्द भी हो सकता है।

    सामान्य गलतियाँ

    • पहचान पत्र से अलग वर्तनी में नाम लिखना, या पिता अथवा पति का नाम छोड़ देना।
    • किसी दूसरे के प्रारूप से ऐसे तथ्य उतार लेना जो आपके मामले पर लागू नहीं होते।
    • जहाँ कार्यालय का अपना निर्धारित प्रपत्र है (पासपोर्ट के अनुलग्नक, विश्वविद्यालय के प्रारूप, बैंक की क्षतिपूर्ति), वहाँ अपना प्रारूप लगाना।
    • खाली स्थान छोड़कर हस्ताक्षर कर देना।
    • नोटरी के सामने उपस्थित हुए बिना प्रमाणन करवाना।

    हर शपथ पत्र पहली बार में सही। Affidavit and NOC Set संपादन योग्य वर्ड और पीडीएफ़ में है, जिसमें छायांकित टिप्पणियाँ बताती हैं कि क्या भरना है, क्या हटाना है और क्या संलग्न करना है।

    नाम परिवर्तन और निवास प्रमाण के विशेष प्रारूपों के लिए हमारी अंग्रेज़ी मार्गदर्शिका Affidavit format for name change and address proof देखें। आरटीआई आवेदन के लिए देखें आरटीआई आवेदन कैसे करें।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    क्या शपथ पत्र सादे कागज़ पर बन सकता है?

    कई कार्यालय सादे कागज़ पर शपथ पत्र या स्व-घोषणा स्वीकार करते हैं। प्राप्तकर्ता कार्यालय के निर्देशों का पालन करें।

    शपथ पत्र पर कितना स्टाम्प शुल्क लगता है?

    यह राज्य के स्टाम्प कानून और प्रयोजन पर निर्भर है। नोटरी या अधिकृत ई-स्टाम्प केंद्र से वर्तमान राशि पूछें।

    क्या नोटरी के सामने स्वयं जाना ज़रूरी है?

    हाँ। अभिसाक्षी को स्वयं उपस्थित होकर, पहचान दिखाकर, अधिकारी के सामने शपथ या प्रतिज्ञान करना और हस्ताक्षर करना होता है।

    शपथ और प्रतिज्ञान में क्या अंतर है?

    शपथ अधिनियम, 1969 के अंतर्गत व्यक्ति शपथ के स्थान पर सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञान कर सकता है। दोनों का विधिक प्रभाव समान है।

    क्या शपथ पत्र की कोई वैधता अवधि होती है?

    कानून में कोई सामान्य अवधि तय नहीं है, पर कई कार्यालय हाल की तिथि का शपथ पत्र माँगते हैं। तथ्य बदल जाएँ तो नया शपथ पत्र बनाएँ।

    नोटरी और शपथ आयुक्त में क्या अंतर है?

    नोटरी नोटरी अधिनियम, 1952 के अंतर्गत नियुक्त होते हैं और सामान्य प्रयोजन के शपथ पत्र प्रमाणित करते हैं। शपथ आयुक्त न्यायालय द्वारा नियुक्त होते हैं और मुख्यतः न्यायालय में दाखिल होने वाले शपथ पत्र प्रमाणित करते हैं।

    *यह लेख सामान्य जानकारी है, विधिक परामर्श नहीं (general information, not legal advice).*

  • आरटीआई आवेदन कैसे करें: प्रारूप, शुल्क और अपील

    आरटीआई आवेदन कैसे करें: प्रारूप, शुल्क और अपील

    अंतिम अद्यतन: 18 अक्टूबर 2026 (Last updated: 18 October 2026)

    संक्षिप्त उत्तर: भारत का कोई भी नागरिक सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किसी भी लोक प्राधिकरण से सूचना माँग सकता है। आवेदन सादे कागज़ पर लोक सूचना अधिकारी (PIO) को संबोधित करके डाक से भेजा जा सकता है या केंद्र सरकार के कार्यालयों के लिए rtionline.gov.in पर ऑनलाइन किया जा सकता है। केंद्र और उत्तर प्रदेश, दोनों में आवेदन शुल्क ₹10 है, और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के आवेदक को प्रमाणपत्र संलग्न करने पर कोई शुल्क नहीं देना होता। लोक सूचना अधिकारी को 30 दिन में उत्तर देना होता है। उत्तर न मिलने या असंतोषजनक होने पर 30 दिन में प्रथम अपील और उसके बाद 90 दिन में सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील की जा सकती है।

    कौन आवेदन कर सकता है और क्या माँगा जा सकता है

    भारत का प्रत्येक नागरिक आवेदन कर सकता है। धारा 6(2) के अनुसार आवेदक को सूचना माँगने का कारण बताना आवश्यक नहीं है, और केवल वही विवरण देना होता है जो उससे संपर्क करने के लिए आवश्यक हो।

    धारा 2(च) के अनुसार “सूचना” में किसी लोक प्राधिकरण के पास उपलब्ध अभिलेख, दस्तावेज़, फ़ाइल टिप्पणियाँ, ई-मेल, राय, सलाह, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, संविदाएँ, रिपोर्ट, नमूने और इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी गई सामग्री शामिल है। आप अभिलेखों का निरीक्षण भी कर सकते हैं और प्रमाणित प्रतियाँ भी ले सकते हैं।

    ध्यान रखें कि लोक सूचना अधिकारी से ऐसी सूचना नहीं माँगी जा सकती जो अभिलेख में है ही नहीं, और न ही उनसे “क्यों” वाले प्रश्नों पर राय या कानून की व्याख्या माँगी जा सकती है। प्रश्न को अभिलेख की प्रति माँगने के रूप में लिखें।

    आवेदन कैसे करें: डाक या हाथ से

    1. सही लोक सूचना अधिकारी चुनें। प्रत्येक लोक प्राधिकरण को लोक सूचना अधिकारी नामित करना होता है (धारा 5)। नाम प्रायः कार्यालय की वेबसाइट या सूचना पट्ट पर होता है। नाम न मिले तो “लोक सूचना अधिकारी, [कार्यालय का नाम]” लिखें।
    2. आवेदन लिखें। सादा कागज़ पर्याप्त है। हिंदी, अंग्रेज़ी या क्षेत्र की राजभाषा में आवेदन किया जा सकता है (धारा 6(1))।
    3. शुल्क जमा करें। ₹10 का भारतीय पोस्टल ऑर्डर, डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक संलग्न करें, या कार्यालय में नकद जमा करके रसीद लें। उत्तर प्रदेश में भुगतान संबंधित लोक प्राधिकरण के पक्ष में किया जाता है।
    4. भेजें। स्पीड पोस्ट से भेजें और डिलीवरी का प्रमाण रखें, या कार्यालय में देकर दिनांकित पावती लें। उप-मंडल स्तर पर सहायक लोक सूचना अधिकारी को भी आवेदन दिया जा सकता है; ऐसे में उत्तर की अवधि में 5 दिन जुड़ जाते हैं (धारा 5(2))।
    5. पूरी प्रति रखें, जिसमें पोस्टल ऑर्डर संख्या और डाक रसीद हो।

    ऑनलाइन आवेदन

    केंद्र सरकार के कार्यालय: rtionline.gov.in पर “Submit Request” चुनें, मंत्रालय या विभाग चुनें, अपना नाम, पता, मोबाइल और ई-मेल भरें, प्रश्न लिखें (लंबा आवेदन हो तो पीडीएफ़ के रूप में अपलोड करें) और ₹10 का भुगतान इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, रुपे कार्ड या यूपीआई से करें। भुगतान के बाद मिली पंजीकरण संख्या सँभाल कर रखें। यह पोर्टल राज्य सरकार के कार्यालयों के लिए नहीं है; ऐसा आवेदन शुल्क लौटाए बिना वापस कर दिया जाता है।

    उत्तर प्रदेश के कार्यालय: राज्य के विभागों के लिए उत्तर प्रदेश का अपना आरटीआई पोर्टल rtionline.up.gov.in है। जो कार्यालय पोर्टल पर न हो, उसके लिए डाक से आवेदन करें।

    शुल्क: केंद्र और उत्तर प्रदेश

    मदकेंद्र (सूचना का अधिकार नियम, 2012)उत्तर प्रदेश (सूचना का अधिकार नियमावली, 2015)
    आवेदन शुल्क₹10₹10
    प्रतियाँ (A4 या A3)₹2 प्रति पृष्ठराज्य नियमों के अनुसार
    अभिलेखों का निरीक्षणपहला घंटा निःशुल्क, उसके बाद ₹5 प्रति घंटापहले घंटे के लिए ₹10, उसके बाद प्रत्येक 15 मिनट के लिए ₹5
    बीपीएल आवेदकबीपीएल प्रमाणपत्र संलग्न करने पर कोई शुल्क नहींबीपीएल प्रमाणपत्र संलग्न करने पर कोई शुल्क नहीं

    यदि प्रतियों के लिए अतिरिक्त शुल्क देय हो, तो लोक सूचना अधिकारी को गणना सहित लिखित सूचना देनी होती है, और उस सूचना से भुगतान तक का समय 30 दिन में नहीं गिना जाता (धारा 7(3))। समय सीमा बीत जाने पर सूचना निःशुल्क देनी होती है (धारा 7(6))। अन्य राज्यों के नियम अलग हो सकते हैं।

    समय सीमाएँ

    चरणसमय सीमाधारा
    लोक सूचना अधिकारी का उत्तरआवेदन प्राप्ति से 30 दिनधारा 7(1)
    किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित सूचना48 घंटेधारा 7(1) का परंतुक
    सहायक लोक सूचना अधिकारी के माध्यम से आवेदन5 दिन अतिरिक्तधारा 5(2)
    सही लोक प्राधिकरण को अंतरण5 दिन के भीतरधारा 6(3)
    तृतीय पक्ष से संबंधित सूचना40 दिनधारा 11
    प्रथम अपीलउत्तर मिलने या उत्तर की नियत तिथि से 30 दिनधारा 19(1)
    द्वितीय अपीलप्रथम अपील के निर्णय या उसकी नियत तिथि से 90 दिनधारा 19(3)

    आवेदन का निःशुल्क नमूना

    सेवा में,
    लोक सूचना अधिकारी,
    [कार्यालय का नाम],
    [पता]

    विषय: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत आवेदन

    1. आवेदक का नाम: [पूरा नाम]
    2. पत्राचार का पता: [पिन कोड सहित पूरा पता]
    3. मोबाइल और ई-मेल: [ ]

    4. वांछित सूचना (अवधि [दिनांक] से [दिनांक] तक):
    (क) मेरे आवेदन संख्या [ ] दिनांक [ ] से संबंधित फ़ाइल टिप्पणियों और पत्राचार की प्रमाणित प्रति।
    (ख) उक्त आवेदन की वर्तमान स्थिति तथा उस अधिकारी का नाम और पदनाम जिसके पास वह लंबित है।
    (ग) ऐसे आवेदनों के निस्तारण की समय सीमा निर्धारित करने वाले नियम, परिपत्र या आदेश की प्रति।

    5. मैं भारत का नागरिक हूँ। मैंने ₹10 का शुल्क [भारतीय पोस्टल ऑर्डर संख्या [ ] दिनांक [ ] / डिमांड ड्राफ्ट / नकद रसीद संख्या [ ]] द्वारा जमा किया है। प्रतियों के लिए अतिरिक्त शुल्क सूचित किए जाने पर देने को तैयार हूँ।

    [यदि लागू हो: मैं गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी में आता/आती हूँ। बीपीएल प्रमाणपत्र की प्रति संलग्न है, अतः कोई शुल्क देय नहीं है।]

    स्थान: [ ]
    दिनांक: [ ]
    हस्ताक्षर: [ ]

    पूरा, संपादन योग्य सेट चाहिए? Lexfolio की RTI Application and Appeals Kit में आवेदन, प्रथम अपील, द्वितीय अपील और धारा 18 की शिकायत के हिंदी और अंग्रेज़ी प्रारूप, सामान्य परिस्थितियों के लिए तैयार प्रश्न, और शुल्क, समय सीमा तथा छूट पर सरल भाषा में मार्गदर्शिका दी गई है।

    प्रश्न ऐसे लिखें कि उत्तर मिले

    • “क्यों” पूछने के बजाय दस्तावेज़ की प्रति माँगें, जैसे “निरीक्षण रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति”।
    • निश्चित अवधि और संदर्भ संख्या लिखें।
    • एक आवेदन में एक ही विषय रखें और बिंदुओं को क्रमांकित करें।
    • लंबित शिकायत के मामले में दैनिक प्रगति, संबंधित अधिकारी का नाम और निर्धारित समय सीमा का नियम माँगें।
    • फ़ाइल बड़ी हो तो पहले निरीक्षण माँगें, फिर चिह्नित पृष्ठों की प्रतियाँ लें।

    किन आधारों पर सूचना देने से मना किया जा सकता है

    धारा 8 में छूट के आधार दिए गए हैं, जैसे राष्ट्र की सुरक्षा, वाणिज्यिक गोपनीयता, वैश्वासिक संबंध में प्राप्त सूचना, अन्वेषण में बाधा डालने वाली सूचना और निर्णय से पहले के मंत्रिमंडल के कागज़ात। धारा 24 के अंतर्गत सूचीबद्ध सुरक्षा और आसूचना संगठन अधिनियम से बाहर हैं, किंतु भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित सूचना उनसे भी माँगी जा सकती है।

    व्यक्तिगत सूचना पर महत्वपूर्ण परिवर्तन: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 की धारा 44(3) ने 13 नवंबर 2025 से धारा 8(1)(ञ) को बदल दिया है। अब यह खंड केवल “व्यक्तिगत सूचना से संबंधित सूचना” को छूट देता है, और पहले वाला लोकहित का परीक्षण इसमें नहीं रहा। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति के सेवा अभिलेख, संपत्ति या आयकर विवरणी जैसी सूचना मिलने की संभावना कम हो गई है। इस संशोधन को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है (Venkatesh Nayak v. Union of India, W.P. (C) No. 177 of 2026 तथा संबद्ध याचिकाएँ)। 16 फ़रवरी 2026 को न्यायालय ने मामला बड़ी पीठ को सौंप दिया, पर संशोधन पर रोक नहीं लगाई। अपनी स्वयं की व्यक्तिगत सूचना आप अपने नाम से माँग सकते हैं।

    उत्तर न मिले या असंतोषजनक हो तो

    प्रथम अपील

    प्रथम अपील उसी लोक प्राधिकरण में लोक सूचना अधिकारी से वरिष्ठ अधिकारी, अर्थात प्रथम अपीलीय अधिकारी, के समक्ष उत्तर मिलने या उत्तर की नियत तिथि से 30 दिन के भीतर की जाती है। केंद्र के नियमों और उत्तर प्रदेश की नियमावली में प्रथम अपील के लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। सामान्य आधार हैं: समय पर उत्तर न मिलना, अधूरा या भ्रामक उत्तर, छूट का गलत प्रयोग, या अत्यधिक शुल्क की माँग।

    द्वितीय अपील और शिकायत

    प्रथम अपील का निर्णय न होने या उससे असंतुष्ट होने पर केंद्रीय लोक प्राधिकरण के मामले में केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य के मामले में राज्य सूचना आयोग (उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग) के समक्ष 90 दिन के भीतर द्वितीय अपील करें। आवेदन, उत्तर, प्रथम अपील और अपीलीय आदेश की प्रतियाँ सूची सहित संलग्न करें। उत्तर प्रदेश में द्वितीय अपील तीन प्रतियों में, सत्यापित प्रतियों और इस प्रमाणपत्र के साथ दी जाती है कि उसी आधार पर पहले कोई अपील नहीं की गई है।

    धारा 18 के अंतर्गत शिकायत करने पर आयोग लोक सूचना अधिकारी पर विलंब के प्रत्येक दिन के लिए ₹250, अधिकतम ₹25,000, का दंड लगा सकता है (धारा 20)। सूचना पाने का रास्ता द्वितीय अपील है; दंड के लिए शिकायत की जाती है।

    अपील की तैयारी कर रहे हैं? RTI Application and Appeals Kit में अपील के तैयार आधार, द्वितीय अपील के दस्तावेज़ों की सूची और शिकायत का प्रारूप हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में है।

    अंग्रेज़ी में विस्तृत जानकारी के लिए देखें: How to file an RTI application online and offline। अपील या शिकायत के साथ शपथपत्र लगाना हो तो हमारी मार्गदर्शिका शपथ पत्र का प्रारूप और नोटरी प्रक्रिया देखें।

    सामान्य गलतियाँ

    • राज्य के कार्यालय के लिए केंद्रीय पोर्टल पर आवेदन करके शुल्क गँवा देना।
    • अभिलेख की जगह “क्यों” वाले प्रश्न पूछना।
    • एक ही आवेदन में कई असंबंधित विषय जोड़ देना।
    • शुल्क और डाक का प्रमाण न रखना।
    • प्रथम अपील की 30 दिन की अवधि चूक जाना।

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

    क्या आरटीआई आवेदन हिंदी में किया जा सकता है?

    हाँ। धारा 6(1) के अनुसार आवेदन हिंदी, अंग्रेज़ी या उस क्षेत्र की राजभाषा में किया जा सकता है।

    30 दिन में उत्तर न मिले तो क्या करें?

    धारा 7(2) के अनुसार इसे सूचना देने से इनकार माना जाता है। प्रथम अपील करें; बाद में सूचना निःशुल्क देनी होगी।

    क्या सूचना माँगने का कारण बताना ज़रूरी है?

    नहीं। धारा 6(2) के अनुसार कोई कारण बताना आवश्यक नहीं है।

    उत्तर प्रदेश में आरटीआई शुल्क कितना है?

    उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के अनुसार आवेदन शुल्क ₹10 है। बीपीएल आवेदक को प्रमाणपत्र संलग्न करने पर शुल्क नहीं देना होता।

    क्या किसी दूसरे व्यक्ति के वेतन या संपत्ति की जानकारी मिल सकती है?

    धारा 8(1)(ञ) में संशोधन के बाद ऐसी व्यक्तिगत सूचना देने से मना किए जाने की संभावना अधिक है। उच्चतम न्यायालय इस संशोधन की जाँच कर रहा है, पर इस पर रोक नहीं है।

    प्रथम अपील के लिए कोई शुल्क है?

    केंद्र के नियमों और उत्तर प्रदेश की नियमावली में कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। अन्य राज्यों के नियम देख लें।

    *यह लेख सामान्य जानकारी है, विधिक परामर्श नहीं (general information, not legal advice).*