अंतिम अद्यतन: 18 अक्टूबर 2026 (Last updated: 18 October 2026)
संक्षिप्त उत्तर: भारत का कोई भी नागरिक सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किसी भी लोक प्राधिकरण से सूचना माँग सकता है। आवेदन सादे कागज़ पर लोक सूचना अधिकारी (PIO) को संबोधित करके डाक से भेजा जा सकता है या केंद्र सरकार के कार्यालयों के लिए rtionline.gov.in पर ऑनलाइन किया जा सकता है। केंद्र और उत्तर प्रदेश, दोनों में आवेदन शुल्क ₹10 है, और गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के आवेदक को प्रमाणपत्र संलग्न करने पर कोई शुल्क नहीं देना होता। लोक सूचना अधिकारी को 30 दिन में उत्तर देना होता है। उत्तर न मिलने या असंतोषजनक होने पर 30 दिन में प्रथम अपील और उसके बाद 90 दिन में सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील की जा सकती है।
कौन आवेदन कर सकता है और क्या माँगा जा सकता है
भारत का प्रत्येक नागरिक आवेदन कर सकता है। धारा 6(2) के अनुसार आवेदक को सूचना माँगने का कारण बताना आवश्यक नहीं है, और केवल वही विवरण देना होता है जो उससे संपर्क करने के लिए आवश्यक हो।
धारा 2(च) के अनुसार “सूचना” में किसी लोक प्राधिकरण के पास उपलब्ध अभिलेख, दस्तावेज़, फ़ाइल टिप्पणियाँ, ई-मेल, राय, सलाह, परिपत्र, आदेश, लॉगबुक, संविदाएँ, रिपोर्ट, नमूने और इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखी गई सामग्री शामिल है। आप अभिलेखों का निरीक्षण भी कर सकते हैं और प्रमाणित प्रतियाँ भी ले सकते हैं।
ध्यान रखें कि लोक सूचना अधिकारी से ऐसी सूचना नहीं माँगी जा सकती जो अभिलेख में है ही नहीं, और न ही उनसे “क्यों” वाले प्रश्नों पर राय या कानून की व्याख्या माँगी जा सकती है। प्रश्न को अभिलेख की प्रति माँगने के रूप में लिखें।
आवेदन कैसे करें: डाक या हाथ से
- सही लोक सूचना अधिकारी चुनें। प्रत्येक लोक प्राधिकरण को लोक सूचना अधिकारी नामित करना होता है (धारा 5)। नाम प्रायः कार्यालय की वेबसाइट या सूचना पट्ट पर होता है। नाम न मिले तो “लोक सूचना अधिकारी, [कार्यालय का नाम]” लिखें।
- आवेदन लिखें। सादा कागज़ पर्याप्त है। हिंदी, अंग्रेज़ी या क्षेत्र की राजभाषा में आवेदन किया जा सकता है (धारा 6(1))।
- शुल्क जमा करें। ₹10 का भारतीय पोस्टल ऑर्डर, डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चेक संलग्न करें, या कार्यालय में नकद जमा करके रसीद लें। उत्तर प्रदेश में भुगतान संबंधित लोक प्राधिकरण के पक्ष में किया जाता है।
- भेजें। स्पीड पोस्ट से भेजें और डिलीवरी का प्रमाण रखें, या कार्यालय में देकर दिनांकित पावती लें। उप-मंडल स्तर पर सहायक लोक सूचना अधिकारी को भी आवेदन दिया जा सकता है; ऐसे में उत्तर की अवधि में 5 दिन जुड़ जाते हैं (धारा 5(2))।
- पूरी प्रति रखें, जिसमें पोस्टल ऑर्डर संख्या और डाक रसीद हो।
ऑनलाइन आवेदन
केंद्र सरकार के कार्यालय: rtionline.gov.in पर “Submit Request” चुनें, मंत्रालय या विभाग चुनें, अपना नाम, पता, मोबाइल और ई-मेल भरें, प्रश्न लिखें (लंबा आवेदन हो तो पीडीएफ़ के रूप में अपलोड करें) और ₹10 का भुगतान इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट या क्रेडिट कार्ड, रुपे कार्ड या यूपीआई से करें। भुगतान के बाद मिली पंजीकरण संख्या सँभाल कर रखें। यह पोर्टल राज्य सरकार के कार्यालयों के लिए नहीं है; ऐसा आवेदन शुल्क लौटाए बिना वापस कर दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश के कार्यालय: राज्य के विभागों के लिए उत्तर प्रदेश का अपना आरटीआई पोर्टल rtionline.up.gov.in है। जो कार्यालय पोर्टल पर न हो, उसके लिए डाक से आवेदन करें।
शुल्क: केंद्र और उत्तर प्रदेश
| मद | केंद्र (सूचना का अधिकार नियम, 2012) | उत्तर प्रदेश (सूचना का अधिकार नियमावली, 2015) |
|---|---|---|
| आवेदन शुल्क | ₹10 | ₹10 |
| प्रतियाँ (A4 या A3) | ₹2 प्रति पृष्ठ | राज्य नियमों के अनुसार |
| अभिलेखों का निरीक्षण | पहला घंटा निःशुल्क, उसके बाद ₹5 प्रति घंटा | पहले घंटे के लिए ₹10, उसके बाद प्रत्येक 15 मिनट के लिए ₹5 |
| बीपीएल आवेदक | बीपीएल प्रमाणपत्र संलग्न करने पर कोई शुल्क नहीं | बीपीएल प्रमाणपत्र संलग्न करने पर कोई शुल्क नहीं |
यदि प्रतियों के लिए अतिरिक्त शुल्क देय हो, तो लोक सूचना अधिकारी को गणना सहित लिखित सूचना देनी होती है, और उस सूचना से भुगतान तक का समय 30 दिन में नहीं गिना जाता (धारा 7(3))। समय सीमा बीत जाने पर सूचना निःशुल्क देनी होती है (धारा 7(6))। अन्य राज्यों के नियम अलग हो सकते हैं।
समय सीमाएँ
| चरण | समय सीमा | धारा |
|---|---|---|
| लोक सूचना अधिकारी का उत्तर | आवेदन प्राप्ति से 30 दिन | धारा 7(1) |
| किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित सूचना | 48 घंटे | धारा 7(1) का परंतुक |
| सहायक लोक सूचना अधिकारी के माध्यम से आवेदन | 5 दिन अतिरिक्त | धारा 5(2) |
| सही लोक प्राधिकरण को अंतरण | 5 दिन के भीतर | धारा 6(3) |
| तृतीय पक्ष से संबंधित सूचना | 40 दिन | धारा 11 |
| प्रथम अपील | उत्तर मिलने या उत्तर की नियत तिथि से 30 दिन | धारा 19(1) |
| द्वितीय अपील | प्रथम अपील के निर्णय या उसकी नियत तिथि से 90 दिन | धारा 19(3) |
आवेदन का निःशुल्क नमूना
सेवा में,
लोक सूचना अधिकारी,
[कार्यालय का नाम],
[पता]
विषय: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के अंतर्गत आवेदन
1. आवेदक का नाम: [पूरा नाम]
2. पत्राचार का पता: [पिन कोड सहित पूरा पता]
3. मोबाइल और ई-मेल: [ ]
4. वांछित सूचना (अवधि [दिनांक] से [दिनांक] तक):
(क) मेरे आवेदन संख्या [ ] दिनांक [ ] से संबंधित फ़ाइल टिप्पणियों और पत्राचार की प्रमाणित प्रति।
(ख) उक्त आवेदन की वर्तमान स्थिति तथा उस अधिकारी का नाम और पदनाम जिसके पास वह लंबित है।
(ग) ऐसे आवेदनों के निस्तारण की समय सीमा निर्धारित करने वाले नियम, परिपत्र या आदेश की प्रति।
5. मैं भारत का नागरिक हूँ। मैंने ₹10 का शुल्क [भारतीय पोस्टल ऑर्डर संख्या [ ] दिनांक [ ] / डिमांड ड्राफ्ट / नकद रसीद संख्या [ ]] द्वारा जमा किया है। प्रतियों के लिए अतिरिक्त शुल्क सूचित किए जाने पर देने को तैयार हूँ।
[यदि लागू हो: मैं गरीबी रेखा से नीचे की श्रेणी में आता/आती हूँ। बीपीएल प्रमाणपत्र की प्रति संलग्न है, अतः कोई शुल्क देय नहीं है।]
स्थान: [ ]
दिनांक: [ ]
हस्ताक्षर: [ ]
पूरा, संपादन योग्य सेट चाहिए? Lexfolio की RTI Application and Appeals Kit में आवेदन, प्रथम अपील, द्वितीय अपील और धारा 18 की शिकायत के हिंदी और अंग्रेज़ी प्रारूप, सामान्य परिस्थितियों के लिए तैयार प्रश्न, और शुल्क, समय सीमा तथा छूट पर सरल भाषा में मार्गदर्शिका दी गई है।
प्रश्न ऐसे लिखें कि उत्तर मिले
- “क्यों” पूछने के बजाय दस्तावेज़ की प्रति माँगें, जैसे “निरीक्षण रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति”।
- निश्चित अवधि और संदर्भ संख्या लिखें।
- एक आवेदन में एक ही विषय रखें और बिंदुओं को क्रमांकित करें।
- लंबित शिकायत के मामले में दैनिक प्रगति, संबंधित अधिकारी का नाम और निर्धारित समय सीमा का नियम माँगें।
- फ़ाइल बड़ी हो तो पहले निरीक्षण माँगें, फिर चिह्नित पृष्ठों की प्रतियाँ लें।
किन आधारों पर सूचना देने से मना किया जा सकता है
धारा 8 में छूट के आधार दिए गए हैं, जैसे राष्ट्र की सुरक्षा, वाणिज्यिक गोपनीयता, वैश्वासिक संबंध में प्राप्त सूचना, अन्वेषण में बाधा डालने वाली सूचना और निर्णय से पहले के मंत्रिमंडल के कागज़ात। धारा 24 के अंतर्गत सूचीबद्ध सुरक्षा और आसूचना संगठन अधिनियम से बाहर हैं, किंतु भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन से संबंधित सूचना उनसे भी माँगी जा सकती है।
व्यक्तिगत सूचना पर महत्वपूर्ण परिवर्तन: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 की धारा 44(3) ने 13 नवंबर 2025 से धारा 8(1)(ञ) को बदल दिया है। अब यह खंड केवल “व्यक्तिगत सूचना से संबंधित सूचना” को छूट देता है, और पहले वाला लोकहित का परीक्षण इसमें नहीं रहा। इसलिए किसी अन्य व्यक्ति के सेवा अभिलेख, संपत्ति या आयकर विवरणी जैसी सूचना मिलने की संभावना कम हो गई है। इस संशोधन को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई है (Venkatesh Nayak v. Union of India, W.P. (C) No. 177 of 2026 तथा संबद्ध याचिकाएँ)। 16 फ़रवरी 2026 को न्यायालय ने मामला बड़ी पीठ को सौंप दिया, पर संशोधन पर रोक नहीं लगाई। अपनी स्वयं की व्यक्तिगत सूचना आप अपने नाम से माँग सकते हैं।
उत्तर न मिले या असंतोषजनक हो तो
प्रथम अपील
प्रथम अपील उसी लोक प्राधिकरण में लोक सूचना अधिकारी से वरिष्ठ अधिकारी, अर्थात प्रथम अपीलीय अधिकारी, के समक्ष उत्तर मिलने या उत्तर की नियत तिथि से 30 दिन के भीतर की जाती है। केंद्र के नियमों और उत्तर प्रदेश की नियमावली में प्रथम अपील के लिए कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। सामान्य आधार हैं: समय पर उत्तर न मिलना, अधूरा या भ्रामक उत्तर, छूट का गलत प्रयोग, या अत्यधिक शुल्क की माँग।
द्वितीय अपील और शिकायत
प्रथम अपील का निर्णय न होने या उससे असंतुष्ट होने पर केंद्रीय लोक प्राधिकरण के मामले में केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य के मामले में राज्य सूचना आयोग (उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग) के समक्ष 90 दिन के भीतर द्वितीय अपील करें। आवेदन, उत्तर, प्रथम अपील और अपीलीय आदेश की प्रतियाँ सूची सहित संलग्न करें। उत्तर प्रदेश में द्वितीय अपील तीन प्रतियों में, सत्यापित प्रतियों और इस प्रमाणपत्र के साथ दी जाती है कि उसी आधार पर पहले कोई अपील नहीं की गई है।
धारा 18 के अंतर्गत शिकायत करने पर आयोग लोक सूचना अधिकारी पर विलंब के प्रत्येक दिन के लिए ₹250, अधिकतम ₹25,000, का दंड लगा सकता है (धारा 20)। सूचना पाने का रास्ता द्वितीय अपील है; दंड के लिए शिकायत की जाती है।
अपील की तैयारी कर रहे हैं? RTI Application and Appeals Kit में अपील के तैयार आधार, द्वितीय अपील के दस्तावेज़ों की सूची और शिकायत का प्रारूप हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में है।
अंग्रेज़ी में विस्तृत जानकारी के लिए देखें: How to file an RTI application online and offline। अपील या शिकायत के साथ शपथपत्र लगाना हो तो हमारी मार्गदर्शिका शपथ पत्र का प्रारूप और नोटरी प्रक्रिया देखें।
सामान्य गलतियाँ
- राज्य के कार्यालय के लिए केंद्रीय पोर्टल पर आवेदन करके शुल्क गँवा देना।
- अभिलेख की जगह “क्यों” वाले प्रश्न पूछना।
- एक ही आवेदन में कई असंबंधित विषय जोड़ देना।
- शुल्क और डाक का प्रमाण न रखना।
- प्रथम अपील की 30 दिन की अवधि चूक जाना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या आरटीआई आवेदन हिंदी में किया जा सकता है?
हाँ। धारा 6(1) के अनुसार आवेदन हिंदी, अंग्रेज़ी या उस क्षेत्र की राजभाषा में किया जा सकता है।
30 दिन में उत्तर न मिले तो क्या करें?
धारा 7(2) के अनुसार इसे सूचना देने से इनकार माना जाता है। प्रथम अपील करें; बाद में सूचना निःशुल्क देनी होगी।
क्या सूचना माँगने का कारण बताना ज़रूरी है?
नहीं। धारा 6(2) के अनुसार कोई कारण बताना आवश्यक नहीं है।
उत्तर प्रदेश में आरटीआई शुल्क कितना है?
उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली, 2015 के अनुसार आवेदन शुल्क ₹10 है। बीपीएल आवेदक को प्रमाणपत्र संलग्न करने पर शुल्क नहीं देना होता।
क्या किसी दूसरे व्यक्ति के वेतन या संपत्ति की जानकारी मिल सकती है?
धारा 8(1)(ञ) में संशोधन के बाद ऐसी व्यक्तिगत सूचना देने से मना किए जाने की संभावना अधिक है। उच्चतम न्यायालय इस संशोधन की जाँच कर रहा है, पर इस पर रोक नहीं है।
प्रथम अपील के लिए कोई शुल्क है?
केंद्र के नियमों और उत्तर प्रदेश की नियमावली में कोई शुल्क निर्धारित नहीं है। अन्य राज्यों के नियम देख लें।
*यह लेख सामान्य जानकारी है, विधिक परामर्श नहीं (general information, not legal advice).*
