English में पढ़ें: Read in English
पुरानी IPC की धारा 506 (आपराधिक अभित्रास का दंड) अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351 है। यह एक धारा अब IPC की तीन धाराओं का काम करती है: 351(1) में परिभाषा (पुरानी 503), 351(2) और 351(3) में सजा (पुरानी 506), और 351(4) में गुमनाम धमकी (पुरानी 507)। साधारण धमकी पर दो वर्ष तक और जान से मारने या घोर उपहति की धमकी पर सात वर्ष तक की सजा है, और तीनों दंड प्रावधान असंज्ञेय व जमानती हैं।
तीन धाराओं की जगह एक धारा
IPC में आपराधिक अभित्रास (criminal intimidation) धारा 503, 506 और 507 में बँटा हुआ था। BNS ने इन्हें चार उपधाराओं वाली एक धारा 351 में समेट दिया है। “506 IPC की नई धारा” का सटीक उत्तर है: मूल अपराध के लिए धारा 351(2) और गंभीर रूप के लिए धारा 351(3)।
आपराधिक अभित्रास क्या है: धारा 351(1)
जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे को उसके शरीर, ख्याति (reputation) या संपत्ति को, या ऐसे किसी व्यक्ति के शरीर या ख्याति को जिसमें वह हितबद्ध है, क्षति पहुँचाने की धमकी देता है, और ऐसा इनमें से किसी आशय से करता है:
- धमकाए गए व्यक्ति को भयभीत (alarm) करना; या
- उससे कोई ऐसा काम करवाना जिसे करने के लिए वह कानूनन बाध्य नहीं है; या
- उससे कोई ऐसा काम छुड़वाना जिसे करने का उसे कानूनी अधिकार है, ताकि वह धमकी के अमल से बच सके।
स्पष्टीकरण के अनुसार किसी ऐसे मृत व्यक्ति की ख्याति को क्षति की धमकी भी इसमें आती है, जिसमें धमकाया गया व्यक्ति हितबद्ध है। धारा का दृष्टांत याद रखने में आसान है: A, B का घर जलाने की धमकी देता है ताकि B अपना दीवानी वाद वापस ले ले। A आपराधिक अभित्रास का दोषी है।
तत्व संक्षेप में
- धमकी (शब्द, लेख, इशारे या आचरण से)।
- पीड़ित या उसके किसी प्रियजन के शरीर, ख्याति या संपत्ति को क्षति की।
- ऊपर बताए गए विशिष्ट आशय के साथ। आशय ही इस अपराध की आत्मा है।
सजा: उपधारा (2), (3) और (4)
धारा 351(2): साधारण अभित्रास
किसी भी भाँति का दो वर्ष तक का कारावास, या जुर्माना, या दोनों। यह IPC 506 का पहला भाग था।
धारा 351(3): गंभीर अभित्रास
सात वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों, जब धमकी हो:
- मृत्यु या घोर उपहति कारित करने की; या
- आग से किसी संपत्ति को नष्ट करने की; या
- मृत्यु, आजीवन कारावास या सात वर्ष तक के कारावास से दंडनीय कोई अपराध करने की; या
- किसी स्त्री पर असतीत्व (unchastity) का लांछन लगाने की।
“जान से मार देंगे” जैसी धमकियाँ इसी उपधारा में आती हैं।
धारा 351(4): गुमनाम धमकी
यदि धमकी गुमनाम संचार (anonymous communication) से दी गई हो, या धमकाने वाले ने अपना नाम या निवास छिपाने की सावधानी बरती हो, तो अभित्रास की सजा के अतिरिक्त दो वर्ष तक का और कारावास दिया जा सकता है। यह IPC 507 की जगह है और फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल या अनजान नंबरों से आने वाली धमकियों पर सीधे लागू होती है।
पुरानी बनाम नई: तालिका और वर्गीकरण
| पुरानी IPC | नई BNS | अपराध | सजा | संज्ञेय या असंज्ञेय | जमानती या गैर-जमानती | विचारण न्यायालय |
|---|---|---|---|---|---|---|
| 503 | 351(1) | आपराधिक अभित्रास की परिभाषा | लागू नहीं | लागू नहीं | लागू नहीं | लागू नहीं |
| 506 (पहला भाग) | 351(2) | आपराधिक अभित्रास | 2 वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों | असंज्ञेय | जमानती | कोई भी मजिस्ट्रेट |
| 506 (दूसरा भाग) | 351(3) | मृत्यु या घोर उपहति आदि की धमकी | 7 वर्ष तक, या जुर्माना, या दोनों | असंज्ञेय | जमानती | प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट |
| 507 | 351(4) | गुमनाम संचार से या पहचान छिपाकर अभित्रास | अभित्रास की सजा के अतिरिक्त 2 वर्ष तक | असंज्ञेय | जमानती | प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट |
शमन (compounding): BNSS की धारा 359(1) के अनुसार धारा 351(2) और 351(3) के अपराध धमकाए गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय की अनुमति के बिना शमनीय हैं। धारा 351(4) शमन की तालिकाओं में नहीं है।
BNS में क्या बदला
- समेकन: IPC की तीन धाराएँ अब चार उपधाराओं वाली एक धारा हैं।
- सजा वही: दो वर्ष, सात वर्ष और गुमनामी पर अतिरिक्त दो वर्ष, सब IPC जैसे ही हैं।
- पड़ोसी धाराओं की नई संख्या: शांति भंग कराने के आशय से अपमान (पुरानी IPC 504) अब धारा 352 BNS है; लोक रिष्टिकारक वक्तव्य (पुरानी IPC 505) अब धारा 353 BNS। जैसे पहले 504 और 506 साथ लगती थीं, वैसे ही अब 351 और 352 अक्सर साथ लगती हैं।
जानने योग्य निर्णय
- माणिक तनेजा बनाम कर्नाटक राज्य (2015) 7 SCC 423: ट्रैफिक पुलिस के फेसबुक पेज पर की गई टिप्पणियों से जुड़ा आपराधिक अभित्रास का मामला सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द किया। अदालत ने कहा कि धमकी भयभीत करने के आशय से होनी चाहिए; केवल कड़ी आलोचना या तीखे शब्द, बिना ऐसे आशय के, अपराध नहीं बनाते।
- इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य, 2025 INSC 410 (28 मार्च 2025): यह मुख्यतः FIR पंजीकरण पर है। अदालत ने कहा कि जहाँ अपराध बोले या लिखे शब्दों पर आधारित हो और सजा तीन से सात वर्ष के बीच हो, वहाँ FIR से पहले BNSS धारा 173(3) की प्रारंभिक जाँच का रास्ता अपनाना सामान्यतः उचित है।
धमकी मिली है? व्यावहारिक कदम
- धमकी सुरक्षित रखें: तारीख और समय के साथ स्क्रीनशॉट लें, कॉल रिकॉर्डिंग और वॉइस नोट सँभालें, चैट न मिटाएँ। सोशल मीडिया पर प्रोफाइल लिंक नोट करें।
- पुलिस को बताएँ: अभित्रास असंज्ञेय है, इसलिए अधिकारी इसे BNSS धारा 174 में दर्ज कर मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा। यदि धमकी के साथ कोई संज्ञेय अपराध भी है (जैसे उद्दापन या पीछा करना), तो FIR दर्ज होनी चाहिए।
- ऑनलाइन धमकी: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) या हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत कर सकते हैं।
- मजिस्ट्रेट के पास परिवाद: न्यायिक मजिस्ट्रेट संज्ञान ले सकते हैं या पुलिस जाँच का आदेश दे सकते हैं।
- तत्काल खतरा हो तो 112 पर कॉल करें।
परीक्षा की दृष्टि से
- मिलान: 503 से 351(1), 506 से 351(2) और 351(3), 507 से 351(4)।
- 351(3) में चार गंभीर धमकियाँ: मृत्यु या घोर उपहति, आग से संपत्ति नाश, मृत्यु/आजीवन/7 वर्ष तक दंडनीय अपराध, और स्त्री पर असतीत्व का लांछन।
- सभी दंड उपधाराएँ असंज्ञेय और जमानती। 351(2) कोई भी मजिस्ट्रेट; 351(3) और 351(4) प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट।
- भयभीत करने (या कोई कार्य करवाने/रुकवाने) का आशय अनिवार्य है, यही माणिक तनेजा का सिद्धांत है।
- पुरानी IPC 504 अब BNS 352 है, 351 नहीं।
त्वरित प्रश्नोत्तरी
Q1. IPC 507 (गुमनाम संचार द्वारा अभित्रास) की जगह BNS का कौन-सा प्रावधान है?
- धारा 351(2)
- धारा 351(4)
- धारा 352
- धारा 351(3)
उत्तर देखें
उत्तर: B. धारा 351(4) गुमनाम या पहचान छिपाकर दी गई धमकी पर दो वर्ष तक की अतिरिक्त सजा देती है।
Q2. धारा 351(3) BNS में जान से मारने की धमकी की अधिकतम सजा है:
- दो वर्ष, या जुर्माना, या दोनों
- दस वर्ष और जुर्माना
- सात वर्ष, या जुर्माना, या दोनों
- आजीवन कारावास
उत्तर देखें
उत्तर: C. धारा 351(3) में सात वर्ष तक कारावास, या जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
Q3. BNSS की पहली अनुसूची के अनुसार धारा 351(3) BNS का अपराध:
- असंज्ञेय, जमानती, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय, गैर-जमानती, सत्र न्यायालय
- संज्ञेय, जमानती, कोई भी मजिस्ट्रेट
- असंज्ञेय, गैर-जमानती, कोई भी मजिस्ट्रेट
उत्तर देखें
उत्तर: A. गंभीर अभित्रास भी असंज्ञेय और जमानती है, और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।
Q4. शांति भंग कराने के आशय से साशय अपमान (पुरानी IPC 504) अब है:
- धारा 351(1) BNS
- धारा 353 BNS
- धारा 356 BNS
- धारा 352 BNS
उत्तर देखें
उत्तर: D. धारा 352 BNS ने IPC 504 की जगह ली है; धारा 353 पुरानी 505 है और धारा 356 मानहानि से संबंधित है।
Q5. धारा 351(2) और 351(3) BNS के अपराधों का शमन कौन कर सकता है?
- कोई नहीं, ये अशमनीय हैं
- धमकाया गया व्यक्ति, बिना न्यायालय की अनुमति
- केवल लोक अभियोजक
- धमकाया गया व्यक्ति, केवल न्यायालय की अनुमति से
उत्तर देखें
उत्तर: B. BNSS धारा 359(1) की तालिका में 351(2) और 351(3) दोनों हैं, इसलिए धमकाया गया व्यक्ति बिना अनुमति शमन कर सकता है।
और अभ्यास करें
BNS, BNSS और BSA की धाराएँ अब हर कानूनी परीक्षा में पूछी जाती हैं। हमारी नए आपराधिक कानून गाइड (हिंदी) में IPC, CrPC और साक्ष्य अधिनियम की हर धारा का नया नंबर दिया गया है, और AIBE XXII का मुफ़्त मॉक टेस्ट इन्हें परीक्षा के समय में परखता है।
रोज़ एक कानूनी MCQ, मुफ़्त, Telegram पर
CLAT, AIBE, NET और न्यायिक सेवा के लिए रोज़ एक प्रश्न उत्तर सहित, साथ में परीक्षा तिथियों, एडमिट कार्ड और नए मुफ़्त मॉक की सूचना।
Sources
- भारतीय न्याय संहिता, 2023, धारा 351, 352 और 353 (India Code पर आधिकारिक पाठ)
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, पहली अनुसूची और धारा 359
- सर्वोच्च न्यायालय: माणिक तनेजा बनाम कर्नाटक राज्य (2015) 7 SCC 423
- सर्वोच्च न्यायालय: इमरान प्रतापगढ़ी बनाम गुजरात राज्य, 2025 INSC 410
Useful books for this topic
- Bare acts of the new criminal laws (BNS, BNSS, BSA)
- Code of Civil Procedure bare act
- Legal drafting and conveyancing books
- Constitution of India (coat pocket edition)
As an Amazon Associate, Lexfolio earns from qualifying purchases. Prices and availability are shown on Amazon.

Leave a Reply