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BNS धारा 85 और 86: पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (पुरानी IPC 498A)

BNS धारा 85 और 86: पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता (पुरानी IPC 498A)

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भारतीय दंड संहिता (IPC) की पुरानी धारा 498A अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में दो धाराओं में बँट गई है: धारा 85 में पति या उसके रिश्तेदार द्वारा क्रूरता का अपराध और सजा है, और धारा 86 में “क्रूरता” की परिभाषा है। सजा पहले जैसी ही है, यानी तीन साल तक का कारावास और जुर्माना। यह अपराध गैर-जमानती है और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

IPC 498A से BNS 85 और 86 तक

पुरानी IPC में धारा 498A एक ही जगह दो काम करती थी। मुख्य भाग में अपराध बनाया गया था और नीचे दिए स्पष्टीकरण (Explanation) में बताया गया था कि क्रूरता किसे कहेंगे। BNS ने विषय-वस्तु वही रखी है, पर दोनों हिस्सों को अलग कर दिया है।

  • धारा 85: पति या पति का कोई रिश्तेदार यदि किसी स्त्री के साथ क्रूरता करता है, तो यह दंडनीय अपराध है। यह धारा BNS के अध्याय V में है, जो स्त्री और बालक के विरुद्ध अपराधों का अध्याय है।
  • धारा 86: यह केवल परिभाषा वाली धारा है, जो साफ कहती है कि यह परिभाषा धारा 85 के प्रयोजन के लिए है।

धारा 86 के अनुसार क्रूरता क्या है

परिभाषा के दो अलग-अलग भाग हैं। इनमें से किसी एक को साबित करना पर्याप्त है।

भाग (क): स्त्री के जीवन या स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाला आचरण

ऐसा कोई भी जानबूझकर किया गया आचरण, जिसकी प्रकृति ऐसी हो कि वह स्त्री को आत्महत्या की ओर धकेल सकता हो, या उसके जीवन, अंग या स्वास्थ्य को गंभीर चोट या खतरा पहुँचा सकता हो। यहाँ स्वास्थ्य में मानसिक और शारीरिक दोनों शामिल हैं। सामान्य घरेलू नोकझोंक इस दायरे में नहीं आती; आचरण गंभीर और जानबूझकर होना चाहिए।

भाग (ख): अवैध माँग के लिए उत्पीड़न

स्त्री का ऐसा उत्पीड़न जिसका उद्देश्य उसे या उसके किसी संबंधी को किसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति (valuable security) की अवैध माँग पूरी करने के लिए मजबूर करना हो, या जो इस कारण किया जाए कि वह या उसका संबंधी ऐसी माँग पूरी नहीं कर पाया। दहेज उत्पीड़न के मामले आमतौर पर इसी भाग में आते हैं।

किस पर मुकदमा चल सकता है

धारा 85 केवल दो श्रेणियों के व्यक्तियों पर लागू होती है: पति और पति के रिश्तेदार। कोई पड़ोसी या पारिवारिक मित्र इस धारा में आरोपी नहीं बन सकता, हालाँकि उस पर किसी दूसरे प्रावधान में कार्रवाई हो सकती है। पीड़िता वह स्त्री होनी चाहिए जिसका विवाह उस पति से हुआ है।

सजा और वर्गीकरण

धारा 85 में तीन वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है और अपराधी जुर्माने का भी भागी होगा। यह सजा IPC 498A के बराबर ही है, यानी सजा में कोई बदलाव नहीं हुआ।

वर्गीकरण भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की पहली अनुसूची (First Schedule) से लिया गया है:

पुरानी IPCनई BNSअपराधसजासंज्ञेय या असंज्ञेयजमानती या गैर-जमानतीविचारण न्यायालय
498A (मुख्य भाग)85पति या उसके रिश्तेदार द्वारा विवाहित स्त्री के साथ क्रूरता3 वर्ष तक कारावास और जुर्मानासंज्ञेय (cognizable), यदि सूचना पीड़िता, उसके रक्त, विवाह या दत्तक संबंधी, या ऐसा कोई संबंधी न होने पर अधिसूचित लोक सेवक द्वारा दी जाएगैर-जमानतीप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
498A (स्पष्टीकरण)86क्रूरता की परिभाषालागू नहीं (परिभाषा)लागू नहींलागू नहींलागू नहीं

व्यवहार में दो बातें और ध्यान रखें:

  • शमनीय नहीं (non-compoundable): धारा 85, BNSS की धारा 359 की किसी भी तालिका में नहीं है। इसलिए पक्षकार आपसी समझौते से इसे खत्म नहीं कर सकते। समझौता होने पर आमतौर पर उच्च न्यायालय से कार्यवाही रद्द (quash) कराई जाती है।
  • शर्त के साथ संज्ञेय: पुलिस बिना मजिस्ट्रेट के आदेश के प्राथमिकी (FIR) दर्ज करके जाँच तभी कर सकती है जब सूचना ऊपर बताए गए व्यक्तियों से आई हो। यह शर्त पुरानी CrPC की अनुसूची में भी थी।

क्या बदला और क्या नहीं

  • अपराध और परिभाषा अब अलग धाराओं (85 और 86) में हैं। क्रूरता के दोनों भागों की भाषा पुराने स्पष्टीकरण जैसी ही है।
  • सजा, गैर-जमानती स्थिति और विचारण न्यायालय में कोई बदलाव नहीं।
  • जुड़े हुए प्रावधानों की संख्या बदली है: दहेज मृत्यु अब BNS धारा 80 (पुरानी IPC 304B), आत्महत्या का दुष्प्रेरण BNS धारा 108 (पुरानी IPC 306), और विवाह के सात वर्ष के भीतर विवाहित स्त्री की आत्महत्या के दुष्प्रेरण की उपधारणा अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (BSA) की धारा 117 में है (पुरानी साक्ष्य अधिनियम धारा 113A)। धारा 117 BSA क्रूरता का अर्थ सीधे BNS धारा 86 से लेती है।

महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय

  • अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) 8 SCC 273: सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि सात वर्ष तक की सजा वाले अपराधों में, जिनमें 498A के मामले भी हैं, गिरफ्तारी अपने आप नहीं होनी चाहिए। पुलिस को कारण दर्ज करने होंगे और हाजिरी के नोटिस का रास्ता अपनाना होगा। BNSS में यह नोटिस धारा 35 में है।
  • दारा लक्ष्मी नारायण बनाम तेलंगाना राज्य, 2024 INSC 953: न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने 498A की वह FIR रद्द कर दी जिसमें पति के रिश्तेदारों के विरुद्ध आरोप अस्पष्ट और सामान्य थे, बिना किसी तारीख या विशिष्ट घटना के। अदालत ने चेताया कि बिना ठोस आरोप के पूरे परिवार को फँसाना उचित नहीं।

पीड़िता क्या करे: व्यावहारिक कदम

  • पहले सुरक्षा: तुरंत खतरा हो तो 112 (राष्ट्रीय आपात नंबर) या 181 (अधिकांश राज्यों में महिला हेल्पलाइन) पर कॉल करें।
  • FIR दर्ज कराएँ: BNSS धारा 173 के “जीरो FIR” नियम के कारण आप किसी भी थाने में रिपोर्ट दर्ज करा सकती हैं, भले ही घटना कहीं और हुई हो। FIR की प्रति आपको निःशुल्क मिलनी चाहिए।
  • विवरण स्पष्ट रखें: तारीख, स्थान, हर व्यक्ति का नाम और उसने क्या किया, यह लिखें। अदालतें अस्पष्ट शिकायतें रद्द कर देती हैं।
  • सबूत सँभालें: मेडिकल रिपोर्ट, फोटो, संदेश, कॉल रिकॉर्डिंग, दबाव में किए गए बैंक ट्रांसफर और गवाहों के नाम।
  • दीवानी संरक्षण भी: घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत मजिस्ट्रेट से संरक्षण, निवास और भरण-पोषण के आदेश माँगे जा सकते हैं। यह आपराधिक मामले के साथ-साथ चल सकता है।
  • पुलिस मना करे तो: शिकायत लिखित रूप में डाक से पुलिस अधीक्षक (SP) को भेजें, फिर BNSS धारा 175(3) के तहत मजिस्ट्रेट के पास जाएँ।

परीक्षा की दृष्टि से

  • विभाजन याद रखें: धारा 85 अपराध है, धारा 86 परिभाषा। प्रश्न अक्सर पूछता है कि क्रूरता को कौन-सी धारा परिभाषित करती है।
  • सजा: 3 वर्ष तक कारावास और जुर्माना। जुर्माना अनिवार्य है।
  • वर्गीकरण: संज्ञेय (शर्त सहित), गैर-जमानती, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय, और अशमनीय।
  • धारा 85, BNS के अध्याय V (स्त्री और बालक के विरुद्ध अपराध) में है।
  • जुड़े प्रश्न: दहेज मृत्यु (BNS 80), आत्महत्या का दुष्प्रेरण (BNS 108), और BSA धारा 117 की उपधारणा।

त्वरित प्रश्नोत्तरी

Q1. IPC 498A के स्थान पर आए अपराध के लिए “क्रूरता” की परिभाषा BNS की किस धारा में है?

  1. धारा 80
  2. धारा 85
  3. धारा 86
  4. धारा 108
उत्तर देखें

उत्तर: C. धारा 86 परिभाषा वाली धारा है, जबकि धारा 85 अपराध और सजा बताती है।

Q2. BNS धारा 85 में अधिकतम कारावास कितना है?

  1. तीन वर्ष
  2. एक वर्ष
  3. दो वर्ष
  4. सात वर्ष
उत्तर देखें

उत्तर: A. धारा 85 में तीन वर्ष तक कारावास और जुर्माने का प्रावधान है, जो IPC 498A के समान है।

Q3. BNSS की पहली अनुसूची के अनुसार BNS धारा 85 का अपराध:

  1. जमानती है और कोई भी मजिस्ट्रेट विचारण कर सकता है
  2. गैर-जमानती है और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय है
  3. जमानती है और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है
  4. गैर-जमानती है और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है
उत्तर देखें

उत्तर: D. पहली अनुसूची इसे गैर-जमानती और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय बताती है।

Q4. निम्न में से किस पर धारा 85 BNS के तहत मुकदमा चल सकता है?

  1. पत्नी को ताना मारने वाला पड़ोसी
  2. पति का रिश्तेदार
  3. पत्नी का अपना भाई
  4. वैवाहिक घर का मकान मालिक
उत्तर देखें

उत्तर: B. धारा 85 केवल पति या पति के रिश्तेदार पर लागू होती है।

Q5. भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 117, जो BNS धारा 86 वाली क्रूरता का अर्थ अपनाती है, किससे संबंधित है?

  1. दहेज मृत्यु की उपधारणा
  2. मृत्युकालिक कथन
  3. विवाहित स्त्री की आत्महत्या के दुष्प्रेरण की उपधारणा
  4. बलात्संग मामलों में सबूत का भार
उत्तर देखें

उत्तर: C. धारा 117 BSA (पुरानी धारा 113A) के अनुसार विवाह के सात वर्ष के भीतर क्रूरता के बाद आत्महत्या होने पर अदालत दुष्प्रेरण की उपधारणा कर सकती है।

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Sources

  • भारतीय न्याय संहिता, 2023, धारा 80, 85, 86 और 108 (India Code पर प्रकाशित आधिकारिक पाठ)
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, पहली अनुसूची (अपराधों का वर्गीकरण) और धारा 359 (अपराधों का शमन)
  • भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023, धारा 117
  • सर्वोच्च न्यायालय: दारा लक्ष्मी नारायण बनाम तेलंगाना राज्य, 2024 INSC 953; अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) 8 SCC 273

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