अगर मकान मालिक आपकी सिक्योरिटी डिपॉज़िट (security deposit) वापस नहीं कर रहा है, तो पहले लिखित माँग भेजें, फिर वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजें। इसके बाद भी पैसा न मिले तो सिविल कोर्ट में वसूली का मुकदमा करें (या जिन राज्यों के कानून में रेंट अथॉरिटी को यह अधिकार है, वहाँ आवेदन करें)। मकान मालिक केवल बकाया किराया, आपके ज़िम्मे के बकाया बिल, या सामान्य टूट-फूट से अधिक नुकसान की कटौती कर सकता है। मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 और उत्तर प्रदेश के 2021 के किरायेदारी कानून में आवासीय मकान की डिपॉज़िट अधिकतम दो महीने के किराये तक सीमित है।
| बिंदु | स्थिति |
|---|---|
| डिपॉज़िट की सीमा (आवासीय) | अधिकतम 2 महीने का किराया: मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 की धारा 11 और उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 |
| डिपॉज़िट की सीमा (गैर-आवासीय) | अधिकतम 6 महीने का किराया, दोनों कानूनों में |
| वापसी कब | जब मकान मालिक खाली कब्ज़ा (vacant possession) वापस ले, वैध कटौतियों के बाद |
| वैध कटौतियाँ | बकाया किराया, सहमति से तय बकाया बिल, सामान्य घिसावट से अधिक नुकसान की मरम्मत |
| पहला कदम | चाबी सौंपने की लिखित रसीद और फ़ोटो के साथ लिखित माँग, फिर कानूनी नोटिस |
| मंच (forum) | जहाँ राज्य कानून में हो वहाँ रेंट अथॉरिटी; या सिविल कोर्ट (लिखित अनुबंध हो तो आदेश 37 CPC के तहत संक्षिप्त वाद) |
| उपभोक्ता आयोग | निजी मकान मालिक से डिपॉज़िट विवाद में सामान्यतः सही रास्ता नहीं |
डिपॉज़िट के बारे में कानून क्या कहता है
मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 (Model Tenancy Act) केंद्र सरकार द्वारा जारी एक आदर्श कानून है। यह केवल उन्हीं राज्यों में लागू होता है जिन्होंने इसे अपने कानून के रूप में अपनाया है। इसकी धारा 11 के अनुसार आवासीय परिसर के लिए सिक्योरिटी डिपॉज़िट दो महीने के किराये से अधिक नहीं हो सकती, और गैर-आवासीय परिसर के लिए छह महीने के किराये से अधिक नहीं। मकान मालिक को खाली कब्ज़ा वापस लेते समय, वैध कटौतियाँ करके, डिपॉज़िट लौटानी होती है।
उत्तर प्रदेश ने इसी तर्ज पर अपना कानून बनाया है: उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 (UP Act 16 of 2021)। इसमें भी दो महीने और छह महीने की यही सीमा है। ताज़ा बदलाव: 21 अगस्त 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदर भूषण साहनी बनाम कंचन कुमारी जैन मामले में इस कानून की धारा 8, 9, 10, 38 और 42 को रद्द कर दिया (रेंट अथॉरिटी की किराया तय करने की शक्ति, स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट से मामले हटाने वाला प्रावधान और सर्वोपरि प्रभाव वाला प्रावधान) और उस हद तक 1972 का पुराना किराया कानून फिर से लागू हो गया। डिपॉज़िट की सीमा वाली धारा 11 रद्द किए गए प्रावधानों में नहीं है, लेकिन उत्तर प्रदेश में किरायेदारी विवाद किस मंच पर जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, इसलिए मामला दायर करने से पहले स्थानीय वकील से सलाह लें।
जिन राज्यों ने ऐसा कानून नहीं अपनाया, वहाँ आपका किरायानामा (rent agreement) और अनुबंध का सामान्य कानून लागू होता है।
कौन-सी कटौती वैध है, कौन-सी नहीं
डिपॉज़िट मकान मालिक को नुकसान से बचाने के लिए होती है। यह मकान छोड़ने की फ़ीस नहीं है। ज़्यादातर विवाद एक ही सवाल पर टिकते हैं: चीज़ खराब हुई है, या सिर्फ़ इस्तेमाल से पुरानी हुई है?
- वैध: न चुकाया गया किराया, बकाया बिजली या पानी का बिल, लिखित रूप से आपके ज़िम्मे तय मेंटेनेंस शुल्क, टूटी खिड़की, टूटा वॉशबेसिन, सूची (inventory) में दर्ज कोई गायब सामान।
- सामान्यतः अवैध: दो साल बाद हल्का पड़ा पेंट, फ़ोटो फ़्रेम की छोटी कीलों के छेद, फ़र्श और स्विच की सामान्य घिसावट, अनुबंध में न लिखा “पेंटिंग चार्ज”, या बिना लिखित सहमति के “सफ़ाई शुल्क”।
- बीच का मामला: अगर अनुबंध में लिखा है कि किरायेदार जाते समय पेंट करवाएगा और आपने उस पर हस्ताक्षर किए हैं, तो उचित पेंटिंग खर्च काटा जा सकता है। पर मकान मालिक उसे बढ़ा-चढ़ाकर नहीं काट सकता।
सामान्य टूट-फूट (normal wear and tear) नुकसान नहीं है। नुकसान के नाम पर कटौती करने वाले मकान मालिक से लिखित में पूछें कि क्या खराब हुआ और उसकी मरम्मत का लगभग खर्च कितना है।
इसे ठीक से सीखें, प्रमाणपत्र के साथ। Everyday Law (हिंदी) के संपत्ति वाले मॉड्यूल में किरायानामा, डिपॉज़िट, RERA, वसीयत और उत्तराधिकार आसान भाषा में समझाए गए हैं, और एक अन्य मॉड्यूल कानूनी नोटिस और उपभोक्ता अधिकार सिखाता है। Everyday Law (हिंदी), ₹299: अपनी गति से पढ़ें, हर मॉड्यूल के बाद क्विज़ और 30 प्रश्नों की अंतिम परीक्षा; 60% अंक पर सत्यापन योग्य Lexfolio प्रमाणपत्र। यह पूर्णता प्रमाणपत्र (certificate of completion) है, कोई डिग्री या वकालत की योग्यता नहीं। इस विषय को गहराई से समझने के लिए Tenant and Landlord Rights कोर्स, ₹299 (अंग्रेज़ी में) भी देखें।
डिपॉज़िट वापस पाने के कदम
- मकान ठीक से सौंपें। तारीख लिखी, हस्ताक्षर की हुई रसीद के बदले चाबी लौटाएँ। हर कमरे की तारीख वाली फ़ोटो और छोटा वीडियो लें, मीटर रीडिंग समेत।
- लिखित माँग भेजें। इस चरण में व्हाट्सऐप संदेश या ईमेल काफ़ी है। डिपॉज़िट की राशि, मकान खाली करने की तारीख, और वापसी के लिए 7 से 15 दिन की समय-सीमा लिखें। फ़ोटो साथ लगाएँ।
- कानूनी नोटिस भेजें। माँग अनसुनी रहे तो वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस अक्सर असर करता है। इसमें तथ्य, राशि, कटौती पर आपत्ति, माँगा गया ब्याज और आगे की कार्रवाई लिखी जाती है। देखें कानूनी नोटिस कैसे भेजें (English)।
- रेंट अथॉरिटी में जाएँ। जहाँ राज्य कानून में रेंट अथॉरिटी को डिपॉज़िट विवाद सुनने का अधिकार है, वहाँ आवेदन किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में अगस्त 2026 के हाईकोर्ट फ़ैसले के बाद सिविल कोर्ट या स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट में वसूली का दावा अधिक सुरक्षित रास्ता है; स्थानीय वकील से पुष्टि कर लें।
- सिविल मुकदमा करें। अगर लिखित किरायानामे में डिपॉज़िट का ज़िक्र है, तो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के आदेश 37 (Order XXXVII) के तहत संक्षिप्त वाद (summary suit) अक्सर संभव है। इसमें मकान मालिक को बचाव के लिए अदालत की अनुमति लेनी पड़ती है, जिससे टालमटोल कठिन हो जाता है। देखें पैसे की वसूली के लिए कानूनी नोटिस (English)।
उपभोक्ता आयोग क्यों आम तौर पर सही रास्ता नहीं
कई किरायेदार पहले उपभोक्ता शिकायत के बारे में सोचते हैं। किसी निजी व्यक्ति मकान मालिक से किरायेदारी को सामान्यतः उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ता द्वारा खरीदी गई “सेवा” नहीं माना जाता। यह संपत्ति और अनुबंध कानून के तहत मकान मालिक और किरायेदार का रिश्ता है। इसलिए निजी मकान मालिक से डिपॉज़िट वापस लेने के लिए उपभोक्ता आयोग आम तौर पर सही मंच नहीं है। जहाँ कोई व्यावसायिक कंपनी सेवाओं का पैकेज बेच रही हो, जैसे कुछ को-लिविंग या पीजी व्यवसाय, वहाँ स्थिति अलग हो सकती है, पर ऐसा मानकर न चलें।
उदाहरण: रीना ने लखनऊ के अलीगंज में ₹15,000 महीने पर फ़्लैट लिया और ₹30,000 डिपॉज़िट दी, जो दो महीने के किराये के बराबर है। मकान खाली करते समय मकान मालिक ने “पेंटिंग” के नाम पर पूरी राशि रोक ली, जबकि अनुबंध में पेंटिंग का कोई ज़िक्र नहीं था। रीना ने चाबी सौंपने की रसीद और फ़ोटो के साथ ईमेल किया, फिर कानूनी नोटिस भिजवाया। जवाब न मिलने पर उसने वकील की सलाह से सिविल कोर्ट में वसूली का दावा दायर किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मकान मालिक दो महीने से ज़्यादा डिपॉज़िट ले सकता है?
मॉडल किरायेदारी अधिनियम अपनाने वाले राज्यों में और उत्तर प्रदेश में, आवासीय मकान के लिए नहीं। दूसरे राज्यों में अपने राज्य का कानून और किरायानामा देखें।
क्या डिपॉज़िट पर ब्याज मिलता है?
तभी, जब किरायानामे में लिखा हो, या देरी होने पर आप कानूनी नोटिस और मुकदमे में ब्याज माँगें, जिस पर अदालत निर्णय करेगी।
मकान मालिक कहता है कि नया किरायेदार आने पर पैसा देगा। क्या यह सही है?
नहीं। मॉडल कानून और उत्तर प्रदेश के कानून में डिपॉज़िट खाली कब्ज़ा वापस लेते समय लौटानी होती है, नए किरायेदार के आने पर नहीं।
मेरे पास लिखित किरायानामा नहीं है। क्या फिर भी पैसा वापस मिल सकता है?
हाँ, पर सबूत ज़रूरी है: बैंक ट्रांसफ़र, रसीद, व्हाट्सऐप संदेश जिनमें डिपॉज़िट का ज़िक्र हो। इनके आधार पर सामान्य वसूली वाद किया जा सकता है।
क्या यह गाइड अंग्रेज़ी में भी है?
हाँ। देखें Landlord not returning security deposit (English)।
छोटा क्विज़
प्रश्न 1. मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 में आवासीय मकान की अधिकतम डिपॉज़िट कितनी है?
- 1 महीने का किराया
- 2 महीने का किराया
- 6 महीने का किराया
- कोई सीमा नहीं
उत्तर देखें
उत्तर: B. धारा 11 के अनुसार 2 महीने का किराया; गैर-आवासीय के लिए 6 महीने।
प्रश्न 2. इनमें से कौन-सी कटौती सामान्यतः वैध है?
- सामान्य घिसावट से हल्का पड़ा पेंट
- फ़ोटो फ़्रेम की कीलों के छेद
- बकाया किराया
- बिना सहमति का “सफ़ाई शुल्क”
उत्तर देखें
उत्तर: C. बकाया किराया वैध कटौती है; सामान्य घिसावट नुकसान नहीं है।
प्रश्न 3. लिखित किरायानामा हो तो किस प्रावधान के तहत संक्षिप्त वसूली वाद किया जा सकता है?
- आदेश 37 CPC
- धारा 138 NI Act
- धारा 173 BNSS
- धारा 18 RERA
उत्तर देखें
उत्तर: A. सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 का आदेश 37 (summary suit)।
किरायेदारी, संपत्ति और रोज़मर्रा के कानूनी अधिकार आसान हिंदी में सीखें: Everyday Law (हिंदी) कोर्स, ₹299।
स्रोत
- इंदर भूषण साहनी बनाम कंचन कुमारी जैन, इलाहाबाद हाईकोर्ट (खंडपीठ), 21 अगस्त 2026
- मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 (Model Tenancy Act, 2021): धारा 11
- उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 (UP Act 16 of 2021)
- सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (Code of Civil Procedure, 1908): आदेश 37
- भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 (Indian Contract Act, 1872)
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019)
यह पेज केवल शिक्षा और सामान्य जानकारी के लिए है, किसी विशेष मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं। कानून 29 अक्टूबर 2026 की स्थिति के अनुसार।
Useful books for this topic
- Bare acts of the new criminal laws (BNS, BNSS, BSA)
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