साइबर फ्रॉड (cyber fraud) होते ही सबसे पहले 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, और उसी समय अपने बैंक को सूचना देकर कार्ड, UPI और नेट बैंकिंग ब्लॉक कराएँ। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसे को रास्ते में रोकने (freeze) की संभावना उतनी अधिक होगी। RBI के मौजूदा नियमों के अनुसार, यदि गलती बैंक या किसी तीसरे पक्ष की है और आपने बैंक का संदेश मिलने के 3 कार्य दिवस (working days) के भीतर सूचना दी, तो आपकी देनदारी शून्य (zero liability) होती है।
| बिंदु | स्थिति |
|---|---|
| राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन | 1930 |
| ऑनलाइन शिकायत पोर्टल | cybercrime.gov.in |
| बैंक को सूचना | तुरंत, बैंक के हेल्पलाइन, ऐप या शाखा से, लिखित रिकॉर्ड के साथ |
| शून्य देनदारी (मौजूदा नियम) | तीसरे पक्ष की गलती पर 3 कार्य दिवस के भीतर सूचना |
| 4 से 7 कार्य दिवस में सूचना | सीमित देनदारी: लेनदेन की राशि या ₹5,000 से ₹25,000 तक की सीमा, जो कम हो |
| बैंक द्वारा अस्थायी वापसी (shadow reversal) | सूचना के 10 कार्य दिवस के भीतर; निपटारा 90 दिन में |
| नए RBI नियम | 1 जनवरी 2027 या उसके बाद के लेनदेन पर लागू होंगे |
| बैंक से संतुष्ट न हों | RBI लोकपाल (RB-IOS 2026), cms.rbi.org.in |
पहले एक घंटे में क्या करें
- 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर “Report Financial Fraud” में शिकायत दर्ज करें। लेनदेन की तारीख, समय, राशि, UTR या ट्रांजैक्शन ID, और ठग का नंबर या UPI ID तैयार रखें। शिकायत संख्या (acknowledgement number) लिख लें।
- बैंक को तुरंत सूचना दें। बैंक के टोल फ्री नंबर, ऐप या ईमेल से धोखाधड़ी की रिपोर्ट करें और कार्ड, UPI, नेट बैंकिंग ब्लॉक कराएँ। बैंक से मिली शिकायत संख्या और ईमेल संभाल कर रखें, क्योंकि आपकी देनदारी इसी सूचना की तारीख से तय होती है।
- पासवर्ड और PIN बदलें। ईमेल, बैंकिंग ऐप और UPI PIN बदलें। अगर आपने कोई स्क्रीन शेयरिंग ऐप (screen sharing app) डाउनलोड किया था, तो उसे तुरंत हटाएँ।
- ठग से बात बंद करें। “पैसा वापस दिलाने” के नाम पर दोबारा कॉल करने वाले अक्सर उसी गिरोह के होते हैं।
बैंक की जिम्मेदारी: मौजूदा RBI नियम
आज (29 अक्टूबर 2026) लागू RBI के ग्राहक देनदारी नियम (customer liability framework) इस प्रकार हैं:
- शून्य देनदारी (zero liability): यदि धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही से हुई, या किसी तीसरे पक्ष की गलती (third-party breach) से हुई और आपने बैंक का संदेश मिलने के 3 कार्य दिवस के भीतर सूचना दे दी।
- सीमित देनदारी (limited liability): 4 से 7 कार्य दिवस में सूचना देने पर, लेनदेन की राशि या खाते/कार्ड के प्रकार के अनुसार ₹5,000 से ₹25,000 की सीमा, जो भी कम हो।
- 7 कार्य दिवस के बाद: बैंक की बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीति (Board-approved policy) के अनुसार।
- बैंक को सूचना मिलने के 10 कार्य दिवस के भीतर राशि खाते में अस्थायी रूप से जमा (shadow reversal) करनी होती है, और शिकायत 90 दिन में निपटानी होती है। ग्राहक की देनदारी साबित करने का भार (burden of proof) बैंक पर है।
यदि आपने खुद OTP या PIN बता दिया, तो यह ग्राहक की लापरवाही मानी जा सकती है और मौजूदा नियमों में राहत कठिन हो जाती है। फिर भी शिकायत ज़रूर करें।
इसे ठीक से सीखें, प्रमाणपत्र के साथ। Everyday Law (हिंदी) के साइबर फ्रॉड, बैंक फ्रॉड और उपभोक्ता अधिकार वाले मॉड्यूल में यही सब आसान भाषा और उदाहरणों के साथ समझाया गया है। Everyday Law (हिंदी), ₹299: अपनी गति से पढ़ें, हर मॉड्यूल के बाद क्विज़ और 30 प्रश्नों की अंतिम परीक्षा; 60% अंक पर सत्यापन योग्य Lexfolio प्रमाणपत्र। यह पूर्णता प्रमाणपत्र (certificate of completion) है, कोई डिग्री या वकालत की योग्यता नहीं।
1 जनवरी 2027 से आने वाले नए RBI नियम
RBI ने जून 2026 में नए निर्देश अंतिम रूप से जारी किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 या उसके बाद होने वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर लागू होंगे। अभी ये लागू नहीं हैं। इनकी मुख्य बातें:
- इनमें ऐसे “धोखाधड़ी वाले” (fraudulent) लेनदेन भी शामिल होंगे जिनमें ग्राहक को बहला कर खुद भुगतान करवाया गया।
- तीसरे पक्ष की गलती में 5 कैलेंडर दिनों (calendar days) के भीतर सूचना पर शून्य देनदारी।
- ₹50,000 तक के कुल नुकसान पर, शुद्ध नुकसान का 85% या ₹25,000, जो कम हो, मुआवजा (compensation), जीवन में एक बार, बशर्ते आपने 5 कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक और 1930 या साइबर पोर्टल दोनों पर सूचना दी हो।
इसलिए आदत डाल लें: बैंक और 1930, दोनों पर, उसी दिन।
सबूत और FIR
पुलिस और बैंक के लिए ये सबूत (evidence) सुरक्षित रखें:
- बैंक के SMS और ईमेल, ट्रांजैक्शन ID और UTR नंबर, खाते का स्टेटमेंट।
- ठग के कॉल लॉग, नंबर, UPI ID, वेबसाइट लिंक, व्हाट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट (बातचीत डिलीट न करें)।
- 1930 और cybercrime.gov.in की शिकायत संख्या।
बड़ी रकम हो या पुलिस कहे, तो थाने में या साइबर सेल में FIR दर्ज कराएँ। BNSS की धारा 173 के अनुसार सूचना किसी भी थाने में दी जा सकती है, चाहे अपराध कहीं भी हुआ हो (ज़ीरो FIR), और FIR की प्रति मुफ्त मिलती है। विस्तार से देखें: FIR कैसे दर्ज करें।
आम ठगी के तरीके
- “डिजिटल अरेस्ट” (digital arrest): कोई खुद को पुलिस, CBI, कस्टम या कोर्ट का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर “गिरफ्तार” बताता है और पैसे ट्रांसफर करवाता है। भारतीय कानून में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है। कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती और न ही “जाँच के लिए” पैसे माँगती है। तुरंत कॉल काटें और 1930 पर बताएँ।
- KYC अपडेट या बिजली कनेक्शन कटने के मैसेज, जिनमें लिंक या ऐप डाउनलोड करने को कहा जाता है।
- UPI “पैसे प्राप्त करने” की रिक्वेस्ट: पैसा लेने के लिए PIN कभी नहीं डालना पड़ता।
- पार्ट-टाइम नौकरी या निवेश टास्क स्कैम, जिनमें पहले छोटा मुनाफा देकर बाद में बड़ी रकम ली जाती है।
- OLX या ऑनलाइन बिक्री में QR कोड भेजकर पैसे खींचना।
उदाहरण: कानपुर की सुनीता जी को “कूरियर में ड्रग्स” के नाम पर वीडियो कॉल आई और ₹80,000 ट्रांसफर करवा लिए गए। बेटे ने आधे घंटे के भीतर 1930 पर कॉल किया और बैंक को सूचना दी। पैसा जिन खातों में गया था, उनमें से कुछ हिस्सा रोका जा सका। देर होती तो पैसा कई खातों से निकल चुका होता।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1930 पर कॉल न लगे तो क्या करें?
तुरंत cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें और बैंक को सूचित करें। दोनों के बाद दोबारा 1930 पर कोशिश करें।
क्या बैंक पैसा वापस करेगा?
मौजूदा नियमों में यह इस पर निर्भर है कि गलती किसकी थी और आपने कितनी जल्दी सूचना दी। तीसरे पक्ष की गलती पर 3 कार्य दिवस में सूचना देने पर देनदारी शून्य है।
बैंक जवाब न दे तो?
बैंक शिकायत खारिज करे, 30 दिन में जवाब न दे या जवाब संतोषजनक न हो, तो RBI लोकपाल (Ombudsman) के पास cms.rbi.org.in पर मुफ्त शिकायत करें।
क्या “डिजिटल अरेस्ट” कानूनी होता है?
नहीं। यह ठगी का तरीका है, कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं।
क्या FIR ज़रूरी है?
1930 या पोर्टल की शिकायत से शुरुआत हो जाती है। बड़ी रकम या पुलिस के कहने पर FIR भी दर्ज कराएँ।
त्वरित क्विज़
Q1. साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की राष्ट्रीय हेल्पलाइन कौन सी है?
- 112
- 1098
- 1930
- 14567
उत्तर देखें
उत्तर: C. 1930 राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन है।
Q2. मौजूदा RBI नियमों में तीसरे पक्ष की गलती पर शून्य देनदारी के लिए कितने समय में सूचना देनी होती है?
- 3 कार्य दिवस
- 7 कार्य दिवस
- 15 दिन
- 30 दिन
उत्तर देखें
उत्तर: A. बैंक का संदेश मिलने के 3 कार्य दिवस के भीतर।
Q3. “डिजिटल अरेस्ट” के बारे में कौन सा कथन सही है?
- यह BNSS की एक प्रक्रिया है
- CBI वीडियो कॉल पर गिरफ्तार कर सकती है
- यह कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, ठगी का तरीका है
- जाँच के लिए पैसे जमा करना ज़रूरी है
उत्तर देखें
उत्तर: C. भारतीय कानून में वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी जैसी कोई प्रक्रिया नहीं है।
पूरा कोर्स हिंदी में पढ़ें: Everyday Law (हिंदी)।
स्रोत
- भारतीय रिज़र्व बैंक: अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहक देनदारी संबंधी निर्देश (2017 परिपत्र, अब 2025 के मास्टर निर्देशों में)
- भारतीय रिज़र्व बैंक: धोखाधड़ी वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर नए निर्देश (जून 2026, 1 जनवरी 2027 से लागू)
- रिज़र्व बैंक एकीकृत लोकपाल योजना, 2026 (RB-IOS 2026)
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023, धारा 173
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000)
यह पेज केवल शिक्षा और सामान्य जानकारी के लिए है, किसी विशेष मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं। कानून 29 अक्टूबर 2026 की स्थिति के अनुसार।
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