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IPC धारा 304A अब BNS धारा 106: लापरवाही से मृत्यु, हिट एंड रन

IPC धारा 304A अब BNS धारा 106: लापरवाही से मृत्यु, हिट एंड रन

IPC की धारा 304A (उपेक्षा से मृत्यु) अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 106 है। धारा 106(1) में सज़ा दो साल से बढ़ाकर पाँच साल तक कर दी गई है और पंजीकृत डॉक्टर के लिए दो साल तक की अलग सीमा रखी गई है। हिट एंड रन वाली धारा 106(2), जिसमें दस साल तक की सज़ा है, अक्टूबर 2026 तक लागू (notified) नहीं हुई है।

बिंदुविवरण
पुरानी धाराIPC धारा 304A
नई धाराBNS धारा 106(1) और 106(2)
सज़ा, 106(1) सामान्य5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना
सज़ा, 106(1) पंजीकृत चिकित्सक2 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना
सज़ा, 106(2) हिट एंड रन10 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना (अभी लागू नहीं)
संज्ञेय (Cognizable)हाँ
जमानती (Bailable)106(1): हाँ। 106(2): नहीं
शमनीय (Compoundable)नहीं
विचारण न्यायालयप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट

धारा 106(1): उपेक्षा से मृत्यु

जो व्यक्ति कोई उतावलापन (rash) या उपेक्षापूर्ण (negligent) कार्य करके किसी की मृत्यु कारित करता है, और वह कार्य आपराधिक मानव वध की श्रेणी में नहीं आता, वह इस धारा में दंडनीय है। इसमें मृत्यु का आशय या ज्ञान नहीं होता। अपराध का आधार केवल यह है कि अभियुक्त ने उतनी सावधानी नहीं बरती जितनी कानून उससे अपेक्षा करता है।

डॉक्टरों के लिए अलग प्रावधान

यदि ऐसा कार्य किसी पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायी (registered medical practitioner) द्वारा चिकित्सा प्रक्रिया करते समय किया गया हो, तो सज़ा दो वर्ष तक का कारावास और जुर्माना है। “पंजीकृत” का अर्थ है वह व्यक्ति जिसका नाम राष्ट्रीय या राज्य चिकित्सा रजिस्टर में दर्ज है। झोलाछाप या अपंजीकृत व्यक्ति को यह कम सज़ा का लाभ नहीं मिलता।

धारा 106(2): हिट एंड रन

यह उपधारा उस चालक के लिए है जो उतावलेपन और उपेक्षा से वाहन चलाकर किसी की मृत्यु कारित करता है और घटना के तुरंत बाद पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट को सूचना दिए बिना भाग जाता है। इसमें दस वर्ष तक का कारावास और जुर्माना रखा गया है, और यह अजमानती है।

अभी लागू क्यों नहीं है

केंद्र सरकार ने 23 फरवरी 2024 की अधिसूचना S.O. 850(E) से BNS को 1 जुलाई 2024 से लागू किया, पर धारा 106(2) को इससे बाहर रखा। जनवरी 2024 में ट्रक चालकों की देशव्यापी हड़ताल के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आश्वासन दिया था कि यह प्रावधान परिवहन संगठनों से चर्चा के बाद ही लागू होगा। जुलाई 2026 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने इसे लागू कराने की मांग वाली जनहित याचिका यह कहकर खारिज कर दी कि अधिसूचना जारी करना केंद्र सरकार का काम है। इसलिए आज हिट एंड रन से हुई मृत्यु के मामलों में भी धारा 106(1) ही लगाई जाती है।

पुराने कानून से क्या बदला

  • सज़ा बढ़ी: IPC 304A में अधिकतम दो वर्ष का कारावास, या जुर्माना, या दोनों था। BNS 106(1) में पाँच वर्ष तक कारावास है और जुर्माना भी अनिवार्य रूप से लगता है।
  • डॉक्टरों के लिए नई श्रेणी: पहले डॉक्टर और सामान्य व्यक्ति के लिए एक ही प्रावधान था। अब पंजीकृत चिकित्सक के लिए अलग, कम सीमा है।
  • हिट एंड रन नया अपराध: IPC में भागने को अलग से दंडित करने वाला कोई प्रावधान नहीं था। 106(2) नया है, पर लागू होना बाकी है।

महत्वपूर्ण केस लॉ

  • जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य ((2005) 6 SCC 1): डॉक्टर पर आपराधिक दायित्व के लिए घोर (gross) लापरवाही आवश्यक है, केवल निर्णय की त्रुटि पर्याप्त नहीं। निजी शिकायत पर कार्यवाही से पहले किसी अन्य सक्षम डॉक्टर की विश्वसनीय राय होनी चाहिए, और डॉक्टर की गिरफ्तारी नियमित रूप से नहीं की जानी चाहिए। ये सुरक्षा उपाय धारा 106 पर भी लागू माने जाते हैं।
  • एलिस्टर एंथनी परेरा बनाम महाराष्ट्र राज्य ((2012) 2 SCC 648): नशे में तेज़ गाड़ी चलाकर फुटपाथ पर सो रहे लोगों को कुचलने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तथ्यों के अनुसार ज्ञान सिद्ध हो तो अपराध 304A से ऊपर उठकर आपराधिक मानव वध (IPC 304 भाग II) बन सकता है।

आम भ्रम

धारा 106 और धारा 105 में अंतर

धारा 105 (आपराधिक मानव वध) में मृत्यु का आशय या ज्ञान होता है। धारा 106 में न आशय होता है न ज्ञान, केवल लापरवाही। इसलिए सड़क दुर्घटना के हर मामले को हत्या जैसा नहीं माना जा सकता, और जानबूझकर किए गए खतरनाक कृत्य को केवल लापरवाही कहकर हल्का नहीं किया जा सकता।

क्या हिट एंड रन में अभी 10 साल की सज़ा है

नहीं। 106(2) अधिसूचित न होने के कारण आज अधिकतम सज़ा 106(1) के अनुसार पाँच वर्ष है।

आम लोगों के लिए व्यावहारिक जानकारी

  • पीड़ित परिवार: तुरंत FIR दर्ज कराएँ, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और FIR की प्रति लें। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) में मुआवज़े का दावा अलग से किया जाता है।
  • वाहन का पता न चले तो: हिट एंड रन पीड़ितों के लिए 2022 की प्रतिकर योजना में मृत्यु पर 2 लाख रुपये और गंभीर चोट पर 50,000 रुपये का प्रावधान है। आवेदन ज़िले के दावा जांच अधिकारी के पास होता है।
  • चालक के लिए: दुर्घटना हो जाए तो घायल को अस्पताल पहुँचाना और पुलिस को सूचना देना कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से सबसे सुरक्षित रास्ता है। 106(1) जमानती है, इसलिए थाने या अदालत से जमानत अधिकार के रूप में मिलती है।
  • चिकित्सा लापरवाही: इलाज के रिकॉर्ड की प्रति तुरंत मांगें। मुआवज़े के लिए उपभोक्ता आयोग का रास्ता भी खुला है।

परीक्षा की दृष्टि से (Exam angle)

  • IPC 304A = BNS 106। सज़ा 2 से बढ़कर 5 वर्ष, डॉक्टर के लिए 2 वर्ष।
  • 106(2) हिट एंड रन: 10 वर्ष, अजमानती, अभी अधिसूचित नहीं। अधिसूचना S.O. 850(E), 23 फरवरी 2024।
  • जैकब मैथ्यू (2005) चिकित्सा लापरवाही पर सबसे अधिक पूछा जाने वाला केस है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently asked questions)

धारा 304A नई धारा क्या है?

IPC की धारा 304A अब BNS की धारा 106 है। सामान्य लापरवाही और डॉक्टर वाला भाग 106(1) में और हिट एंड रन 106(2) में है।

क्या हिट एंड रन कानून 106(2) लागू हो गया है?

नहीं। 1 जुलाई 2024 को BNS लागू करते समय 106(2) को बाहर रखा गया था और अक्टूबर 2026 तक इसकी अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

धारा 106 में जमानत मिलती है या नहीं?

धारा 106(1) जमानती है, इसलिए जमानत अधिकार के रूप में मिलती है। लागू होने पर 106(2) अजमानती होगी।

डॉक्टर की लापरवाही से मौत पर कौन सी धारा लगती है?

BNS धारा 106(1) का परंतुक, जिसमें पंजीकृत चिकित्सक के लिए दो वर्ष तक का कारावास और जुर्माना है। घोर लापरवाही सिद्ध होना आवश्यक है।

सड़क दुर्घटना में मृत्यु पर क्या समझौता हो सकता है?

धारा 106 BNSS धारा 359 की शमनीय सूची में नहीं है। मुआवज़ा MACT में अलग से तय होता है।

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क्विक क्विज़ (Quick quiz)

Q1. BNS धारा 106(1) में सामान्य व्यक्ति के लिए अधिकतम सज़ा कितनी है?

  1. 2 वर्ष
  2. 3 वर्ष
  3. 5 वर्ष
  4. 10 वर्ष
उत्तर देखें

उत्तर: C. 106(1) में 5 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना है। IPC 304A में यह 2 वर्ष था।

Q2. अक्टूबर 2026 की स्थिति में BNS धारा 106(2) (हिट एंड रन) के बारे में कौन सा कथन सही है?

  1. इसे केंद्र सरकार ने अभी अधिसूचित (notify) नहीं किया है
  2. यह 1 जुलाई 2024 से लागू है
  3. सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित किया है
  4. इसे संसद ने निरस्त कर दिया है
उत्तर देखें

उत्तर: A. अधिसूचना S.O. 850(E) दिनांक 23 फरवरी 2024 ने BNS को 1 जुलाई 2024 से लागू किया, पर धारा 106(2) को बाहर रखा, और यह अभी अधिसूचित नहीं हुई है।

Q3. पंजीकृत चिकित्सक द्वारा चिकित्सा प्रक्रिया में लापरवाही से मृत्यु पर अधिकतम सज़ा क्या है?

  1. 5 वर्ष और जुर्माना
  2. 2 वर्ष और जुर्माना
  3. केवल जुर्माना
  4. 1 वर्ष
उत्तर देखें

उत्तर: B. 106(1) के परंतुक में पंजीकृत चिकित्सक के लिए 2 वर्ष तक कारावास और जुर्माना है।

Q4. चिकित्सा लापरवाही में आपराधिक दायित्व के लिए घोर लापरवाही आवश्यक है, यह किस केस में कहा गया?

  1. एलिस्टर एंथनी परेरा
  2. विरसा सिंह
  3. सतबीर सिंह
  4. जैकब मैथ्यू
उत्तर देखें

उत्तर: D. जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य (2005) में यह मानक तय हुआ।

Q5. धारा 106(1) के बारे में कौन सा कथन सही है?

  1. अजमानती और सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय
  2. असंज्ञेय और जमानती
  3. संज्ञेय, जमानती और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय
  4. शमनीय
उत्तर देखें

उत्तर: C. BNSS प्रथम अनुसूची में 106(1) संज्ञेय, जमानती और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है।

स्रोत (Sources)

  • भारतीय न्याय संहिता, 2023, धारा 106 (India Code)
  • गृह मंत्रालय अधिसूचना S.O. 850(E), दिनांक 23 फरवरी 2024
  • जैकब मैथ्यू बनाम पंजाब राज्य, (2005) 6 SCC 1
  • रितु गौबा बनाम पुलिस आयुक्त, दिल्ली उच्च न्यायालय, 15 जुलाई 2026
  • हिट एंड रन मोटर दुर्घटना पीड़ित प्रतिकर योजना, 2022

यह पृष्ठ शिक्षा और सामान्य जानकारी के लिए है, किसी विशेष मामले के लिए कानूनी सलाह नहीं।

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